ख़बरें

यूपीः घोटाला करने के लिए अधिकारियों ने उगा दिए किसान

तर्कसंगत

February 20, 2018

SHARES

किसान जीतोड़ मेहनत करके फसल उगाते हैं लेकिन फिर भी उनके हाथ में दाम नहीं आ पाते.

वहीं उत्तर प्रदेश के बरेली ज़िले में किसानों का हक़ मारने के लिए अधिकारियों ने काग़ज़ों में किसान ही उगा दिए.

उत्तर प्रदेश को ऑपरेटिव फ़ेडेरेशन के अधिकारियों ने दलालों के साथ मिलकर क़रीब दो करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की कोशिश की.

लेकिन दस्तावेज़ों के सत्यापन के दौरान ज़िले के विकास अधिकारी सत्येंद्र सिंह ने फ़र्ज़ीवाड़ा पकड़ लिया.

दरअसल उत्तर प्रदेश  सरकार ने उड़द दाल का निम्नतम समर्थन मूल्य 5400 रुपए क्विंटल तय कर रखा है. लेकिन मंडी में उड़द दाल के दाम काफी कम है और किसान इसे तीन से साढ़े तीन हज़ार रुपए क्विंटल तक बेच रहे हैं.

अधिकारियों ने मंडी के दलालों के साथ मिलकर 3600 रुपए क्विंटल की दर से 12000 क्विंटल उड़द दाल ख़रीद ली और इसे काग़ज़ों में 5400 रुपए क्विंटल समर्थन मूल्य पर ख़रीदा हुआ दिखा दिया.

यानी प्रत्येक क्विंटल 1800 रुपए अधिकारी की जेब में चले जाते.

लेकिन जब भुगतान के लिए फ़ाइल उच्च अधिकारियों के पास पहुंची तो फ़र्ज़ीवाड़ा पकड़ा गया.

बरेली के ज़िला विकास अधिकारी सत्येंद्र सिंह ने तर्कसंगत को बताया है घोटाला करने के लिए अधिकारियों ने किसानों के फ़र्ज़ी नाम और पते भरे थे.

सत्येंद्र सिंह के मुताबिक कुछ नाम मनगढ़ंत थे वहीं कुछ वास्तविक किसानों के भी नाम थे.

दरअसल कोआपरेटिव फेडेरेशन के पास आसपास के किसानों का डाटा रहता है क्योंकि आमतौर पर किसान खाद फेडेरेशन से ही ख़रीते हैं.

सत्येंद्र सिंह के मुताबिक फ़र्ज़ीवाड़ा पकड़े जाने के बाद भुगतान रोक दिया गया है और संबंधित अधिकारियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करा दी गई है.

सत्येंद्र सिंह के मुताबिक फिलहाल अधिकारी फरार चल रहे हैं.

वहीं इस फ़र्ज़ीवाड़े के सामने आने के बाद अन्य भुगतानों की फ़ाइलों की भी क्रॉस चैकिंग की जा रही है.

उत्तर प्रदेश में हाल के दिनों में किसानों की की आत्महत्या के कई मामले सामने आए हैं.

किसान खेती से आमदनी कम होने से परेशान हैं. एक न्यूनतम आमदनी सुनिश्चित करने के लिए सरकार फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य भी तय करती है लेकिन जानकारी की कमी के कारण किसान मंडी में उपज नहीं बेच पाते हैं और व्यापारियों को उपज बेच देते हैं.

इस समय यूपी में किसानों से उड़द की दा व्यापारी 3200-3600 रुपए क्विंटल तक बेच रहे हैं. वहीं इसका समर्थन मूल्य 5400 रुपए क्विंटल है.

अधिकारी बीच में घोटाले कर किसानों को चपत लगा रहे हैं और अपनी जेबें भर रहे हैं.

बरेली में ज़िला विकास अधिकारी की सतर्कता से सामने आया घोटाला पूरे खेल की बानगी भर है.

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...