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दवाओं पर 1737 प्रतिशत तक मुनाफ़ा ले रहे हैं अस्पताल

तर्कसंगत

February 21, 2018

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राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) के एक शोध से पता चला है कि दिल्ली में निजी अस्पताल दवाओं पर 1737 प्रतिशत तक मुनाफ़ा कमा रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक दवाओं, कंज़्यूमेबल और डायगनॉस्टिक पर ही मरीज़ों के बिल का 46 प्रतिशत ख़र्च हो जाता है.

एनपीपीए ने दिल्ली के चार बड़े निजी अस्पतालों के मरीज़ों के बिलों पर शोध किया है.

मंगलवार को जारी इस शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊंचे दामों पर बेची जा रही दवाओं से हो रही मुनाफ़ाखोरी का सबसे ज़्यादा फ़ायदा अस्पतालों को पहुंच रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक अस्पताल दवा और उपभोग वस्तु निर्माताओं से बहुत ज़्यादा मुनाफ़ा कमा रहा हैं.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अस्पताल अपने इन-हाऊस फ़ार्मेसी से ही मरीज़ों को दवा ख़रीदने के लिए कहते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक अधिकतर मरीज़ दवा, उपभोग वस्तुएं, डिस्पोज़ेबल आदि अस्पतालों की फ़ार्मेसी से ऊंचे दाम पर ख़रीदते हैं जबकि ये चीज़ें खुले बाज़ार में काफ़ी कम क़ीमत पर उपलब्ध हैं.

एनपीपीए ने कहा है कि दवाओं का अधिकतम मूल्य पहले से ही बहुत ज़्यादा रखा जाता है. ऐसे में अस्पताल एमआरपी का उल्लंघन किए बिना ही भारी मुनाफ़ा दवाओं और कंज़्यूमेबल उपकरणों पर कमा लेते हैं.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अस्पताल दवा निर्माता कंपनियों पर ऊंची एमआरपी प्रिंट करने का दबाव बनाते हैं.

चूंकि अस्पताल बड़ी मात्रा में ऑर्डर देते हैं ऐसे में निर्माता उनके दबाव में आ जाते हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि दवा और अन्य चिकित्सीय उपभोग वस्तुओं के निर्माता अपना फ़ायदा जोड़कर एमआरपी को बहुत ऊंचा कर देते हैं.

ऐसे में मरीज़ों को ही ये बड़ी ही हुई क़ीमत चुकानी पड़ती है.

एनपीपीए मरीज़ों के परिजनों की ओर से दायर शिकायतों की जांच कर रही है.

शिकायतों में कहा गया है कि अस्पताल ने शुरुआत में इलाज के ख़र्च का जो अनुमान बताया था वो आख़िर में तीन चार गुणा बढ़ गया.

वहीं एनपीपीए ने शोध में शामिल अस्पतालों के नाम प्रकाशित नहीं किए हैं.

एनपीपीए का कहना है कि ये प्रवृत्ति आमतौर पर अधिकतर निजी अस्पतालों में है.

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