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स्वर्ण मंदिर के लंगर पर लगा दो करोड़ रुपए का जीएसटी, राहत की मांग

तर्कसंगत

March 7, 2018

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अमृतसर के स्वर्ण मंदिर ने लंगर के लिए ख़रीदे गए सामान पर जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक लंगर के लिए ख़रीदे गए सामान पर दो करोड़ रुपए का कर चुकाया है.

स्वर्ण मंदिर में रोज़ाना 55 हज़ार से 60 हज़ार लोगों को मुफ़्त खाना खिलाया जाता है जिस पर सालान करीब 75 करोड़ रुपए का ख़र्च आता है.

इससे पहले वित्त मंत्रालय की ओर से भ्रामक जानकारी दी गई थी की मुफ़्त खाना खिलाने वाले सभी सामुदायिक संस्थान जीएसटी से बाहर होंगे.

गुरुद्वारों में भूखों को खाना परोसने की पुरानी परपंरा है. देशभर के प्रसिद्ध गुरुद्वारों में श्रद्धालुओं को लंगर छकाया जाता है.

अमृतसर का स्वर्ण मंदिर सिख आस्था का केंद्र है.  यहां सप्ताहांत पर लंगर छकने वालों की संख्या एक लाख तक पहुंच जाती है जबकि रोज़ाना औसतन 55 से 60 हज़ार लोग यहां लंगर छकते हैं.

अधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक एक जुलाई 2017 से 31 जनवरी 2018 के बीच स्वर्ण मंदिर ने करीब 20 करोड़ की सामग्री लंगर के लिए ख़रीदी और उस पर क़रीद 1.9 करोड़ रुपए जीएसटी के रूप में चुकाए.

खाने में इस्तेमाल किए जाने वाले घी पर 12 प्रतिशत जीएसटी है. मंदिर परिसर ने 4188 क्विंटल घी खरीदा जिस पर 1.5 करोड़ रुपए टैक्स चुकाया गया.

जीएसटी लागू होने से पहले लंगर के लिए ख़रीदे जाने वाले सभी सामान पर टैक्स छूट थी.

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) गुरुद्वारों के लिए खरीदे जाने वाला खाद्य सामानों से जीएसटी हटाने की मांग कर रही है.

समिति ने जीएसटी से छूट पाने के लिए कई पत्र लिखे हैं और प्रतिनिधिमंडल भी अधिकारियों से मिले हैं लेकिन अभी तक कोई राहत नहीं मिल सकी है.

वहीं वित्त मंत्रालय ने जुलाई में एक भ्रामक सूचना जारी करते हुए कहा था कि समुदायों की ओर से चलाई जाने वाली मुफ़्त रसोइयों के लिए खरीदे जाने वाले सामान पर जीएसटी नहीं लगेगा.

मंत्रालय की ओर से जारी अधिकारिक बयान में कहा गया था, मंदिरों, मस्जिदों, दरगाहों, गुरुद्वारों, चर्चों जैसे धार्मिक स्थलों पर दिए जाने वाले प्रसाद पर किसी तरह का कोई जीएसटी नहीं लगेगा.

हालांकि जब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने लंगर के सामान पर जीएसटी छूट मांगी थी तब वित्त मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि लंगर बनाने के सामान पर जीएसटी छूट नहीं है.

एसजीपीसी ने लंगर के सामान पर छूट के लिए कई बार वित्त मंत्रालय को पत्र लिखे हैं और अपने प्रतिनिधिमंडल भेजे हैं लेकिन अभी तक कोई राहत नहीं मिल सकी है.

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