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कठुआः समुदाय में दहशत फैलने के लिए की गई थी बच्ची की बलात्कार के बाद हत्या

तर्कसंगत

March 15, 2018

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जम्मू-कश्मीर के कठुआ में एक आठ साल की बच्ची की बलात्कार के बाद हत्या के मामले में पुलिस जांच में पता चला है कि ये हत्या साज़िश के तहत की गई थी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक ये वारदात जानवर चराने वाले बकरवाल समुदाय में दहशत फैलाने और उन्हें इलाक़े से हटाने की साज़िश का हिस्सा थी.

पुलिस के मुताबिक हत्या के सिलसिले में गिरफ़्तार किया गया एक व्यक्ति नाबालिग नहीं है. पहले उसे नाबालिग माना गया था. पुलिस ने इस मामले में दो विशेष पुलिस अधिकारियों को गिरफ़्तार किया है.

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज जम्मू में किए गए फ़िज़ीकल, डेंटल और रेडियोलॉजिकल परीक्षण के बाद अभियुक्त की उम्र 19 साल निर्धारित की गई है.

हत्या की ये वारदात जनवरी में हुई थी. जानवर चराने की बकरवाल समुदाय की आठ साल की बच्ची लापता हो गई थी. 11 जनवरी को उसका शव रसाना गांव के जंगल से मिला था.

पीड़िता के शव पर किए गए परीक्षणों से पता चला था कि लापता होने के तीन-चार दिन बाद तक वो ज़िंदा थी और उसे एक बड़े प्रार्थना स्थल में रखा गया था.

लड़की का शव प्रार्थना स्थल से क़रीब दो सौ मीटर दूर ही मिला था.

पीड़िता की मां के मुताबिक, “वो एक बातूनी लड़की थी और मौजमस्ती में रहती थी. वो अजनबियों का भी मुस्कुराकर अभिवादन करती थी. उसे सात दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया था. उसने नर्क भोगा होगा. उसकी दो पसलियां टूट गईं थीं. उसका शारीरिक शोषण भी हुआ.”

पुलिस जांच में पता चला है कि अभियुक्त और उसके रिश्तेदार ने साज़िश के तहत पीड़िता को अग़वा किया था ताकि बकरवाल समुदाय को डराया जा सके और वो इलाक़ा छोड़ दें.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक बकरवाल समुदाय के करीब दो सौ लोगों ने स्थानीय लोगों से ज़मीन ख़रीदकर मकान बनवा लिए हैं.

पुलिस जांच

शव मिलने के दो दिन बाद पुलिस ने एक लड़के को शक़ के तहत गिरफ़्तार किया था और कहा था कि वो नाबालिग है. लेकिन बाद में हुई चिकित्सीय जांच में उसके बालिग होने की पुष्टि हुई है.

पुलिस पूछताछ में अभियुक्त ने बताया है कि लड़की को ज़बरदस्ती ड्रग्स का सेवन करवाया गया और उसका बलात्कार किया गया. विरोध करने पर उसे पीटा गया और हत्या कर दी गई.

मामले की जांच 23 जनवरी को जम्मू-कश्मीर पुलिस की अपराध शाखा को दे दी गई थी.

पुलिस ने इस मामले में विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया और सुरेंद्र वर्मा को गिरफ़्तार किया था.

हालांकि स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस हत्या में एक से ज़्यादा लोग लिप्त हैं और पूरे मामले की सीबीआई या न्यायिक जांच होनी चाहिए.

कश्मीर के कार्यकर्ता तालिब हुसैन ने इकोनॉमिक टाइम्स से कहा, “पुलिस की अब तक की कार्रवाई लीपापोती ही रही है और भेदभाव और अपमान के आरोपों को ही उकसाती है. सरकार मामले को क्राइम ब्रांच को सौंपकर और उलझाने की कोशिश कर रही है. वो इस जघन्य अपराध के अभियुक्तों को बचाना चाहते हैं.”

सांप्रदायिक तनाव

इस वारदात के बाद कठुआ और आसपास के इलाक़े में सांप्रदायिक तनाव हुआ है. पीड़िता चरवाहा मुसलमान समुदाय से आती है जबकि गिरफ्‍तार किए गए अभियुक्त हिंदू समुदाय से हैं.

हिंदू एकता मंच नाम के एक समूह ने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की है. इस समूह को स्थानीय भाजपा नेताओं और हिंदूवादी कार्यकर्ताओं का समर्थन है.

14 फ़रवरी को हिंदू एकता मंच ने कठुआ में मार्च निकाला था. भाजपा के कठुआ ज़िलाअध्यक्ष प्रेम नाथ डोगरा ने पुलिस जांच को जेहाद बताया था. उनका कहना था कि पुलिस जांच दल में पचास प्रतिशत हिंदू पुलिसकर्मी होने चाहिए.

कश्मीर से आने वाले एक मुसलमान अधिकारी पुलिस जांच दल के प्रमुख हैं. स्थानीय हिंदू ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस बकरवाल समुदाय के दबाव में जांच कर रही है.

राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने कहा था कि वो प्रदर्शन से परेशान हैं जबकि विपक्ष की नेशनल कांफ्रेंस ने घटना की आलोचना करते हुए कहा था कि इस पर सांप्रदायिक राजनीति नहीं की जानी चाहिए.

तस्वीरः फ्री प्रैस कश्मीर, स्रोतः इंडियन एक्सप्रेस, इकोनॉमिक टाइम्स, द लॉजिकल इंडीयन

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