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अल्ट्रासाउंड के बदले किया गर्भपात, फ़ीस न चुका पाने पर अस्पताल ने जेवर उतरवाए

तर्कसंगत

March 15, 2018

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उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ ज़िले में सरकारी अस्पताल में इलाज कराने आई एक महिला को टेस्ट के लिए एक निजी अस्पताल में भेज दिया गया. जहां फीस न चुकाने पर महिला के जेवर उतरवा लिए गए.

स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली ये घटना हुई अलीगढ़ के अतरौली क्षेत्र में.

यहां एक गर्भवती महिला दवा लेने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची थी. सरकारी डॉक्टर ने पर्ची लिखकर महिला को अस्पताल के पास ही स्थित एक निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भेज दिया.

दरअसल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं है. ये अलग बात है कि सरकारी मापदंडों के हिसाब से यहां अल्ट्रासाउंड की सुविधा होनी चाहिए.

लेकिन यहां पीपीपी यानी प्राइवेट पब्लिक पार्टरनशिप के तहत निजी अस्पताल से अल्ट्रासाउंड करने का अनुबंध सरकारी अस्पताल ने कर रखा है.

स्थानीय अख़बार अमर उजाला की एक रिपोर्ट के मुताबिक विमलेश देवी नाम की महिला को गुमराह करके निजी अस्पताल में उनका गर्भपात कर दिया गया.

यहां मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने महिला से दस हज़ार रुपए की फ़ीस मांगी जिसे चुकाने में महिला ने असमर्थता जताई तो उसके सोने के जेवर ज़बरदस्ती उतरवा लिए गए.

बाद में जब विमलेश देवी के पति ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने की चेतावनी दी तो कुंडल और पायल वापस कर दिए गए.

पीड़ित परिवार ने बुधवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर शिकायत दर्ज करवाई है.

अलीगढ़ के सीएमओ (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) का कहना है मामले की जांच की जा रही है. क्या महिला का गर्भपात किया जाना ज़रूरी था इसकी जांच भी की जाएगी.

ये सिर्फ़ बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं का एक और मामला नहीं है. बल्कि घोर अमानवीयता और खुली लूट भी है.

सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वो ग़रीबों को फ्री इलाज उपलब्ध कराए. सरकारी अस्पतालों में पहुंचने वाले अधिकतर मरीज़ बेहद ग़रीब परिवारों से होते हैं.

यूं तो सरकारी अस्पतालों में सभी तरह की जांचें और इलाज लगभग मुफ़्त ही होते हैं लेकिन इस मामले में पीपीपी मॉडल महिला के लिए घातक साबित हो गया है.

पीपीपी मॉडल के तहत महिला को सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल भेजा गया था जहां उसका गर्भपात कर दिया गया. अब प्रशासन जांच की बात कहकर पूरी घटना पर लीपापोती करने की कोशिश कर रहा है.

इस संबंध में तर्कसंगत ने अलीगढ़ के सीएमओ डॉ. एम एल अग्रवाल से बात करने की कोशिश की लेकिन उनका सरकारी सीयूजी नंबर बंद था.

स्रोतः अमर उजाला

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