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रवांडा में मस्जिदों के लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध लगाया गया

तर्कसंगत

March 15, 2018

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रवांडा ने राजधानी किगाली की मस्जिदों के लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.

बीबीसी न्यूज़ के मुताबिक अधिकारियों का कहना है कि मस्जिदों से दी जाने वाले पांच वक़्त की अज़ान से लोगों ने परेशानी होने की शिकायत की है.

ख़ासकर शहर के न्यारूगेंगे ज़िले में लोग अज़ान की आवाज़ से परेशान थे. इस इलाक़े में ही शहर की सबसे बड़ी मस्जिदें हैं.

रवांडा में निर्माण नियमों और ध्वनि प्रदूषण से संबंधित नियमों के उल्लंघन के चलते क़रीब 1500 चर्च भी बंद किए गए हैं.

रवांडा एक इसाई बहुल देश है जिसमें करीब पांच प्रतिशत लोग मुसलमान हैं.

सरकार का कहना है कि मुसलमानों ने प्रतिबंध का पालन किया है.

वहीं मुसलमान कार्यकर्ताओं का कहना है कि लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध के बजाए आवाज़ कम करने के लिए कहा जाना चाहिए था.

रवांडा में हाल के दशकों का सबसे भीषण नरसंहार साल 1994 में हुआ था जिसमें आठ लाख से अधिक लोग मारे गए थे.

सौ दिन चले उस नरसंहार में रोमन कैथोलिक चर्चों में भीषण हिंसा हुई थी क्योंकि सांप्रदायिक हिंसा के दौरान बहुत से तुत्सी समुदाय के लोगों ने इन चर्चों में ही शरण ली थी.

इस नरसंहार के बाद रवांडा के लोगों का रोमन कैथोलिक चर्च में विश्वास कम हुआ था और वो पेंटेकोस्टलिज़्म और इस्लाम की ओर चले गए थे.

ताज़ा प्रतिबंधों के निशाने पर भले ही मस्जिदें हैं लेकिन ये कहना सही नहीं होगा कि सिर्फ़ मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है.

आज के रवांडा में मुसलमानों को पूरी आजादी है और वो पांचों वक़्त मस्जिदों में जाकर नमाज़ पढ़ सकते हैं.

हालांकि पेंटेकोस्लट समुदाय से जुड़े लोगों को इतनी आज़ादी नहीं है.

बीते एक महीने के दौरान देशभर में पेंटेकोस्टल समुदाय से जुड़े 1500 चर्चों को नियमों के उल्लंघन के नाम पर बंद कर दिया गया है.   अब इस समुयाद के लोगों के पास प्रार्थना करने के लिए कोई स्थान नहीं है.

कुछ विश्लेषक धार्मिक स्थलों पर प्रतिबंधों को राजनीति से जोड़कर भी देख रहे हैं.

माना जा रहा है कि देशभर के धार्मिक समूह लंबे समय से राष्ट्रपति और शासक पॉल कुगामे के प्रति अपनी निष्ठा ज़ाहिर कर सकते हैं.

हो सकता है कि पेंटेकोस्टल चर्च से जुड़े नेता पॉल कुगामे की बात न मान रहे हैं और उन्हें  इसी वजह से निशाना बनाया जा रहा है.

लेकिन पेंटेकोस्टल समुदाय के चर्चों को निशाना बनाने में प्रशासन सही भी है क्योंकि अधिकतर चर्चों में बहुत ज़्यादा शोर होता है, इनके डिज़ाइन में ख़ामिया हैं और आम इनसे लोगों की सुरक्षा से जुड़े सवाल भी जायज़ हैं.

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