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भारत में एक लाख से अधिक बच्चों का यौन शोषण

तर्कसंगत

March 18, 2018

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भारत में साल 2016 में एक लाख से अधिक बच्चों का यौन शोषण किया गया.

ये जानकारी एक याचिका में सुप्रीम कोर्ट में दी गई है.

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरौ के डाटा के हवाले से याचिका में कहा गया है कि साल 2016 में देशभर में बाल यौन शोषण के एक लाख से अधिक मामले दर्ज हुए लेकिन अदालतें सिर्फ़ 229 मामलों में ही सज़ा सुना पाईं.

याचिका की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की बैंच ने  हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से देश भर में प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल आफेंसे (पोस्को) एक्ट के तहत लंबित मामलों की जानाकारी मांगी है.

पोस्को क़ानून के तहत दर्ज मामलों में अदालतों को चार्जशीट दायर होने के एक साल के भीतर फ़ैसला करना होता है.

अधिवक्ता अलख आलोक श्रीवास्तव ने दिल्ली में एक आठ महीने की बच्ची से बलात्कार के मामले के बाद बच्चों को यौन शोषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल की है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका का संज्ञान लिया है और समाधान निकालने की बात कही है.

बैंच ने देश के सभी हाई कोर्ट से पोस्को एक्ट के तहत लंबित मामलों की रिपोर्च चार सप्ताह के भीतर मांगी है.

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि पोस्को एक्ट के तहत मुक़दमा दर्ज होने के माह के भीतर अदालतें फैसला दें.

फिलहाल चार्जशीट दायर होने के एक साल के भीतर फ़ैसला सुनाना होता है. इस याचिका पर अगली सुनवाई अब बीस अप्रैल को होगी.

भारत में बाल यौन शोषण एक बड़ा मुद्दा है और बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए विशेष अधिनियम पोस्को बनाया गया है.

इस क़ानून के तहत पुलिस को तुरंत मामला दर्ज करने के अलावा तेज़ी से जांच करने के भी निर्देष दिए गए हैं.

बावजूद इस सबके भारत के अलग-अलग हिस्सों से कम उम्र के बच्चों के साथ यौन शोषण की रिपोर्टें आती रहती हैं.

बाल यौन शोषण के कई मामलों में शोषण करने वाले बच्चों की जान पहचान के या करीबी लोग ही होते हैं और कई बार मुक़दमे दर्ज ही नहीं हो पाते.

जो मुक़दमे अदालतों तक पहुंचते हैं उनमें तेज़ी से सुनवाई हो तो शायद बाल यौन शोषण के मामले कम हो सकें.

स्रोतः दैनिक भास्कर

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