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जानकारीः रेल यात्रा के दौरान बिल न मिले तो भुगतान न करें

तर्कसंगत

March 21, 2018

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भारतीय रेलवे की नई नीति के तहत यदि किसी यात्री को खाने-पीने की चीज़ का बिल नहीं दिया जाता है तो उसके लिए भुगतान करना अनिवार्य नहीं होगा.

केंद्रीय रेलवे मंत्री पीयुष गोयल ने ये क़दम रेलयात्रियों को अधिक क़ीमत चुकाने से बचाने के लिए उठाया है.

रेल यात्रा के दौरान खाने-पीने की चीज़ों पर दाम से ज़्यादा वसूली की शिकायत आम थी.

31 मार्च 2018 तक सभी ट्रेनों में इस संबंध में संदेश लिखवा दिए जाएंगे.

इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज़्म कार्पोरेशन (आईआरसीटीसी) की वेबसाइट पर भी ये संदेश जारी कर दिया गया है.

रिपोर्टों के मुताबिक कैटरिंग से जुड़ी अधिकतर शिकायतें दाम से अधिक क़ीमत वसूले जाने को लेकर थीं.

नई नीति के लागू होने के बाद से यात्रियों को खाना सही दाम पर मिलने की उम्मीद की जा रही है.

पिछले साल अप्रैल और अक्तूबर के बीच में ही दाम से अधिक वसूली की सात हज़ार से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं थीं.

अब यदि खाने के डिब्बे पर क़ीमत अंकित नहीं की जाती है तो बेचने वाले वेंडर का लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा.

एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते साल तो कैटरिंग कंपनियो के लाइसेंस रद्द किए गए थे और कैटरिंग कंपनियों पर पांच हज़ार बार ज़ुर्माना लगाया गया था.

अधिकारियों के मुताबिक कई बार बिल मांगे जाने पर बिल बुक न होने या यात्रा के बाद बिल देने का बहाना बनाया जाता था.

रेलमंत्री का कहना है कि नई नीति के लागू होने के बाद से इस तरह की शिकायतें ख़त्म हो जाएंगी.

भारतीय रेलवे ने खाद्य सामग्री की बिक्री की जांच के लिए इंस्पेक्टर भी तैनात किए हैं.

भारतीय रेलवे में सफ़र करने वाले यात्री कई तरह की शिकायतें करते हैं जिनमें खाने से जुड़ी शिकायतें सबसे ज़्यादा होती है.

केंद्रीय रेल मंत्री के इस क़दम को सही दिशा में उठाया गया एक अहम क़दम माना जा रहा है, बशर्ते वो उसी ज़ोर शोर से लागू है जिस ज़ोर शोर से उठाया गया है.

स्रोतः द इंडियन एक्सप्रे, फ़र्स्टपोस्ट, द फ़ाइनेंसियल एक्सप्रेस

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