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बेटे की चाहत में बेटी हुई अनचाही

Poonam

March 28, 2018

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देश में बेटियों की हालत को बेहतर करने के लिए तमाम योजनाएं लाई जा रही हैं. उन्हें समान अधिकार मिले, देश का विकास हो और लोगों के मन में लड़कियों के लिए भी वही सम्मान हो जो बेटे के लिए होता है. ऐसी बातें सिर्फ कागजी लगती हैं जब बेटे की तमन्ना किसी व्यक्ति के अंदर इस कदर घर कर जाती है कि बेटी होती है तो ना सिर्फ वो दिल से अनचाही होती है बल्कि उसे नाम भी ऐसा दे दिया जाता है जो जिंदगी भर शायद इस बिटिया को कचोटता रहेगा.

मध्य प्रदेश के मंदसौर बेटे की चाह में जब बेटी हुई तो मां बाप ने उसका नाम अनचाही रख दिया. यहां बेटे और बेटियों में आज भी भेदभाव व्याप्त है. आज भी यहां कोई भी माता-पिता नहीं चाहते कि उनके घर में बैटी पैदा हो. बेटी के पैदा होने पर बेटे होने की चाह में उनका नाम अंतिम बाला, अंतिमा, अनचाही या इंतिह्ना रख दिया जाता है.

मंदसौर जिले में सब्जी की दुकान चलाने वाले कैलाश नाथ और उनकी पत्नी की चार बेटियां थीं. इसके बाद वो एक बेटा चाहते थे लेकिन पांचवीं बार भी बेटी ने ही जन्म लिया. बेटे की तमन्ना पूरी नहीं हुई तो इसकी नाराजगी बेटी पर निकाली और उसका नाम ही अनचाही रख दिया.

इस इलाके कि ये मान्यता है की इस तरह के नाम रखने पर अगली बार बेटा होता है. अनचाही आज समझदार हो गई है. स्कूल से लेकर जहां जहां भी अनचाही जाती है तो उसके नाम को लेकर सवाल उठते हैं और दिल को दर्द देने वाले तंज कसे जाते हैं. उसका नाम आधार कार्ड, बैंक पासबुक, मार्कशीट समेत सभी दस्तावेजो में अनचाही दर्ज है, जिसके चलते उसे शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है. अनचाही का बस एक सपना है कि उसका नाम बदल जाए ताकि समाज उसे अलग नजरों से ना देखे

इस देश में महिलाओं की पूजा होती है, लड़की को लक्ष्मी का रूप माना जाता है लेकिन लगता है कि ये सब सिर्फ कहने भर को है क्योंकि अगर ऐसा ना होता तो यूं देश की बिटिया अनचाही ना कहलाई जाती

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