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हथियारों से लैस मर्दों के भीड़ में बैठी इस निहत्थी महिला ने जो किया वो काबिले तारीफ है

Poonam

March 30, 2018

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सोशल मीडिया आज हर तरीके की ख़बरों से अटा पड़ा है लेकिन ऐसी ख़बरें बहुत कम ही मिलती हैं जिन्हें देखते ही दिल करता है की तुरंत शेयर कर दिया जाए. IPS नवनीत सिकेरा ने फेसबुक वॉल पर ये कहानी शेयर की है जो तर्कसंगत आप तक पहुंचाना चाहता है.

ये तस्वीर पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले के लालगंज आदिवासी क्षेत्र की है. जहां एक परंपरा है की इलाके के आदिवासी एक साथ मिलकर हजारों कि संख्या में हाथों में डण्डे-लाठी खुखरी , नुकीले हथियार लिए शिकार के लिए जंगल में जाते हैं. जाहिर सी बात है की जब इतने लोगों की भीड़ किसी भी जंगल में जाएगी तो कई निरीह जानवर मारे जाते हैं. जिससे वहां का इकोसिस्टम भी खराब हो जाएगा.

हालांकी परंपरा के तौर पर ये आदिवासी ऐसा करते हैं और अगर बात परंपरा की हो तो इसे लेकर भावनात्मक जुड़ाव होना लाजमी है. इसलिए वहां की ADFO पुरबी महतो जिनकी जिम्मेदारी है उस इलाके के जंगलों की देखभाल करने की उन्हें इस मामले में दखल देना पड़ा. उन्होंने तय कर लिया कि कैसे भी इस परंपरा को वो रोककर रहेंगी.तोउन्होंने जागरूकता अभियान चलाया, कानून का डर भी दिखाया. लेकिन कुछ फर्क नहीं पड़ा. आदिवासी झुकने को तैयार नहीं हुए.

हर बार की तरह इस बार भी नियत दिन हजारों आदिवासियों को महाशिकार के लिए निकलना था लेकिन पूरबी महतो ने तय कर लिया था वह इसे रोक कर रहेंगी.  पांच हजार से अधिक आदिवासी हथियार लेकर जंगल की ओर बढे जा रहे थे तब पूरबी महतो ने माहौल भांपते हुए जनजाति के बुजुर्गों से एक भावनात्मक अपील की और वह जमीन पर हाथ जोड़कर बैठ गयीं. उन्होंने कहा कि अपने हथियार उठाओ और मुझे भी मार दो , लेकिन जब तक मेरी सांस है , मैं आपको आगे नहीं जाने दूँगी.

पूरबी महतो की यह भावनात्मक अपील काम कर गई और बुजुर्गों के निर्णय पर सभी आदिवासी वापस लौट गए. कुछ इस तरीके से इस नायिका ने कितने ही जानवरों को मरने से बचा लिया. इस महानायिका पूरबी महतो को तर्कसंगत की टीम सलाम करती है.

 

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