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प्रेरणादायक : 25-वर्षीय इंजीनियर जिन्होंने नागरिक मुद्दों के निपटारे के लिए 170 से अधिक शिकायतें दर्ज कराई, जिनमें 150 में मिली सफलता

तर्कसंगत

March 31, 2018

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जैसे-जैसे हम डिजिटल इंडिया के युग में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं, हम डिजिटल सरकारी पोर्टल्स के माध्यम से अपनी शिकायतों के तुरंत समाधान की तलाश करते हैं, लेकिन ऐसे पोर्टल के बारे में जागरूकता की कमी अभी भी नागरिक या सामाजिक मुद्दों को हल करने में एक बाधा है.

हालांकि, जोधपुर शहर के 25-वर्षीय प्रत्यूष जोशी जो इलेक्ट्रॉनिक और संचार अभियंता हैं वो नागरिक मुद्दों को गंभीरता से समझकर उसके निवारण के लिए लगातार काम कर रहे हैं. इसी वजह से वो आम लोगों की भीड़ से बिल्कुल अलग हैं.

ग्रेजुएशन करने के बाद, जब वो शहर के बाहरी क्षेत्र में फिर से रहने को आये तो वहां की अनुचित डिसपोजल सिस्टम, टूटी हुई स्ट्रीट लाइट्स, अनियमित जलापूर्ति व्यवस्था और ऐसे ही कई अन्य नागरिक मुद्दों को देखकर दंग रह गये. इन समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने ‘सुगम समाधान’ के जरिये आवाज़ बुलंद की. ‘सुगम समाधान’ “राजस्थान सम्पर्क” पोर्टल के अंतर्गत है. इस ऑनलाइन पोर्टल की मदद से जल्द ही उन समस्याओं का निवारण हो गया ये कोशिश मानवता के लिए कुछ कर गुज़रने की बस एक शुरुआत थी.

इसकी शुरुआत कैसे हुई ?

नागरिक मुद्दों से निपटने के अपने अनुभव को साझा करते हुए प्रत्यूष बताते हैं,”कॉलेज पूरा करने के बाद संयोगवश सुगम समाधान शब्द से मेरा सामना हुआ. सुगम समाधान राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान सम्पर्क जन सामान्य की शिकायतों को दर्ज करने और समस्याओं का निराकरण पाने का प्रयास है. 2014 में हम जोधपुर चले गए,तब वहां भी ऐसे ही नागरिक मुद्दों के निवारण लिए आवाजें उठाई जा रही थीं. मैं ऐसे मामलों पर शिकायत करने लगा. वहां से मैने सीखा कि यदि आपको संबंधित अधिकारियों से कोई जवाब नहीं मिलता है तो इसका मतलब ये नहीं है कि आप शिकायत करना छोड़ दें. आपको अपने जीवन शैली में सुधार करने के लिए शिकायत करने का पूरा अधिकार है.”

मुझे इससे प्रेरणा मिली और मैंने उन मुद्दों पर काम करना शुरू कर दिया. मैं एक के बाद एक शिकायत दर्ज करवाने लगा. कई बार ऐसा हुआ कि शिकायत को अनसुना कर दिया गया लेकिन अब सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए पोर्टल को अपग्रेड कर दिया है. यदी शिकायत के निवारण के लिए संबंधित अधिकारी कोई काम नहीं करता है या फिर काम करने में देरी करता है तो ऑटोमैटिक रिमांइडर सिस्टम के द्वारा सूचना उच्च अधिकारियों को खुद ब खुद चली जाती है.

प्रत्यूष इसका श्रेय अपनी पारिवारिक माहौल को देते हैं, जहां से उनको दूसरों की सेवा करने की प्रेरणा मिलती है. वो बताते हैं की माता-पिता और घर के बुजुर्ग उनका मार्गदर्शन करते हैं जबकी उनके भाइयों और दोस्तों ने हर मुहिम में उनकी मदद की. इसी से प्रेरित होकर वो लोगों की शिकायतों की सुनवाई में भरपूर मदद करते हैं. प्रत्यूष बताते हैं की, “जब हम किसी क्षेत्र के स्ट्रीट लाइट्स लगाने की सूची बना रहे थे, तब मेरे भाई और दोस्तों ने इस क्षेत्र में 50-60 स्ट्रीट लाइट लगवाने के लिए अधिकारियों को एक पत्र लिखने में मेरी मदद की थी. उनके इस सहयोग ने मुझे बहुत प्रोत्साहित किया. इन मुद्दों के साथ समस्या ये है कि ये सभी सामान्य कार्य प्रक्रिया हैं लेकिन उन्हें उजागर करना और फिर उसमें आगे की कार्रवाई के लिए आवाज उठाना ही मेरा लक्ष्य बन गया है.”

चुनौतियों पर विजय प्राप्त किया

शिकायत दर्ज कराने के दौरान होने वाली समस्याओं के बारे में पूछने पर प्रत्यूष बताते हैं की, “मैंने जोधपुर, पाली, बाड़मेर एवं जैसलमेर के विभिन्न विभागों में नागरिकों की समस्याओं पर 170 शिकायतें दर्ज की थीं, जिनमें से 150 से अधिक शिकायतें तो पहले दौर में ही दूर कर दी गयी.”

उन्होंने फिर बताया की निगम का एक मुद्दा जो काफी समय से निवारण के लंबीत था उसकी जानकारी मुख्यमंत्री के कार्यालय भेजते ही काम को पूरा कर दिया गया. पाली शहर के एक कॉलोनी में जल विभाग की लापरवाही के कारण उस इलाके के लोग सात सालों तक पानी की समस्या से जूझ रहे थे. मरू महोत्सव के दौरान भी इस समस्या को उजागर किया गया था. लेकिन इस समस्या का निवारण तब हुआ जब इस मामले को मुख्यमंत्री के कार्यालय में सूचित किया गया.

हाल ही में हुए एक वाक्ये के बारे में प्रत्यूष बताते हैं की, “डॉ. ताराचंद जो सेवानिवृत्ति(2009) के बाद से ही वेतन विसंगति से परेशान थे, उन्होंने अपने स्तर से 2018 तक जयपुर में प्रशासनिक मुख्यालय से संपर्क किया. जिसमें जैसलमेर के सीएमएचओ को उनके बकाया का भुगतान करने को कहा गया लेकिन आदेश मिलने के 3 महीने बाद भी वहां के अधिकारियों ने इस मामले को नज़रअंदाज कर दिया. इसी बीच मैं उनके बेटे से मिला जो दुबई में काम करते हैं, उन्होंने मुझे पूरा वाक्या बताया और हमने संबंधित विभाग में शिकायत की. शिकायत करने के 2-3 दिनों में ही जैसलमेर में सीएमएचओ कार्यालय तक आदेश पहुंच गया जिसमें अधिकारियों से गंभीरता से मामले की जांच करने और डॉ. ताराचंद को अतिरिक्त दंड के साथ अंतिम बिल का भुगतान करने के लिए कहा गया. फाइनल बिल भेजने का मुख्य लाभ ये होगा कि अंतिम भुगतान प्रमाणपत्र (एलपीसी) तैयार होने के बाद जब उसे पेंशन विभाग के पास भेजा जाएगा तो फाइनल पेंशन राशि में कुछ बढ़ोत्तरी होगी.”

इसके अलावा प्रत्यूष ने पर्यटन विभाग, नगर निगम, जल आपूर्ति, लोक कल्याण विभाग आदि से संबंधित कई मुद्दों पर आवाज उठाई है.

2017 में, प्रत्यूष को “वीर दुर्गादास राठौड़ स्मृति पुरस्कार” से सम्मानित किया गया.

प्रत्यूष की शिकायतों से आया बदलाव

1. ‘तिवारी पंचायत समिति’ के अंदर की सड़क जो ‘ओसिया’ की तरफ जाती है उसपर गड्ढे मिलते हैं जिससे यात्रियों को असुविधा होती है और कभी-कभी घातक दुर्घटना भी हो जाती है. 21 जून, 2015 को इससे संबंधित शिकायत दर्ज की गई. ‘तिवारी’ से ‘ओसियाँ’ तक की सड़क का जायजा लिया गया और अब सड़क बन कर तैयार है.

2. एक सड़क जो ‘तिवारी’ से ‘बालेसर’ तक ‘गागा’ और ‘खुदियाला’ होकर जाती है उसमें भी कई जगह गड्ढे हैं और सड़क जहाँ-तहाँ से टूटी हुई है. बड़े पैमाने पर लोग इस सड़क का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए यह बड़ी दुर्घटनाओं कभी भी हो सकती है. 21जुलाई 2015 को इसकी शिकायत दर्ज की गई. शिकायत का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों ने जवाब दिया कि यह सड़क ‘तिवारी’ से ‘बालेसर’ तक बिछाई जा चुकी है.

3. डॉ. सोलंकी के घर के करीब एसबीआई एनआरआई शाखा पूरी तरह जीर्ण-शीर्ण से हालत में है. इसकी वजह भारी वर्षा नहीं है बल्की वहां की जमीन की मिट्टी का कटान है. 29 जुलाई 2015 को इसकी शिकायत दर्ज की गई. यह अब तैयार किया चुका है.

4. ‘फालुदी ग्रामीण क्षेत्र’ में जोधपुर की तरफ जाने वाली बड़ी पाइपलाइन से पानी लीक होने की वजह से कई लाख लीटर पानी बर्बाद हो रहा था. इसके सुधार के लिए उपाय किये गये लेकिन पूरी तरह से पानी के नियंत्रण में थोड़ा समय लगा जो अब पूरी तरह ठीक हो चुका है.

अब तक 170 से अधिक ऐसे मुद्दों का समाधान किया गया जिनका मूल्य औसतन 4 करोड़ रुपये का था. मुख्यमंत्री ने सभी लंबित कार्यों को पूरा करने के लिए इस जिम्मेदार युवा नागरिक द्वारा किए गए काम की सराहना की.

तर्कसंगत के लिए सन्देश

“वैसे तो इस स्थिति में मैं किसी के लिए प्रेरणा नहीं हूं, “लेकिन मैं युवाओं से अनुरोध करता हूं कि जब आप किसी भी सरकार या प्रणाली की आलोचना के दौर में प्रवेश करते हैं तो मुख्य रूप से सिस्टम की निष्क्रियता आप पर हावी होती है. आप इसे परख कर उसे सुधारने में मदद कर सकते हैं. देश स्वतः ही आगे बढ़ जाएगा. मैं आपको एक प्रगतिशील भारत के जिम्मेदार नागरिक के रूप में सबसे पहले अपने देश को प्राथमिकता देने का अनुरोध करता हूं जो अंततः राष्ट्र के प्रति आपकी ज़िम्मेदारियों में वृद्धि करेगा. “

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