मेरी कहानी

एक माली से सफल उद्दमी बनने का सफर

तर्कसंगत

April 2, 2018

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अगर मौका मिले तो हमारे बीच ऐसे कई लोग हैं जो बेहतर काम कर सकते हैं उस काम के अलावा जो वो करते आ रहे हैं. हम सब का सपना होता है की हम सफल व्यवसायी बनें लेकिन क्या जब कोई अवसर आपके दरवाजे पर दस्तक दे रहा हो तो आप उसे भुनाने के लिए तैयार हैं. निनाद वेंगुर्लेकर ने रामभाऊ नामक एक मज़दूर की प्रेरणादायक कहानी साझा की है, जिन्होंने एक साधारण माली से सफल व्यवसायी बनने का सफर बहुत ही कम समय में तय किया है.

कौन हैं रामभाऊ

निनाद वेंगुर्लेकर (जो पेशे के एक इंजीनियर हैं) लिखते हैं की “चार साल पहले मैंने रामभाऊ को अपनी बिल्डिंग के सामने वाली सड़क के किनारे से मिट्टी हटाने का काम करते हुए देखा. उसी समय मैंने रामभाऊ से पुछा की क्या आप मेरे घर में हाउस गार्डन बनाने का काम करेंगे. रामभाऊ ने बिना कुछ सोचे समझे मेरे प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया. मैं तो आश्चर्यचकित तब हो गया जब उन्होंने यह तक जानने की कोशिश नहीं की कि मैं उनसे क्या काम करवाना चाहता हूँ और उनसे उस काम के बदले में पारिश्रमिक कितना मिलेगा? उसके बाद रामभाऊ जी जान से मेरे लिए हाउस गार्डन बनाने के काम में जुट गए और एक तरह से उन्होंने मेरे लिए मुफ्त में हाउस गार्डन बना दिया.

मेरे हाउस गार्डन का काम पूरा करने के बाद रामभाऊ आस पास के लोगों को मेरे हाउस गार्डन को सैंपल कि तरह दिखाने लगे. लोगों को उनके द्वारा डिज़ाइन किया गया गार्डन पसंद आने लगा और लोग उन्हें काम देने लगे. दो सालों में उन्होंने लगभग 20 घरों में हाउस गार्डन बना दिया.
आस पास के लोगों को दिए रोजगार के अवसर

काम का बोझ ज्यादा होने के कारण उन्होंने 3-4 लोगों के साथ -साथ अपनी पत्नी को भी अपने काम में हाथ बटाने के लिए रख लिया. लगभग एक साल बाद रामभाऊ ने मुझे बताया कि उसने अपने बेटे के साथ मिलकर उसने टेम्पो डिलीवरी सर्विस शुरू कर दी है और उसे एक बड़े बंगले के गार्डन को डिज़ाइन करने का काम भी मिला है.

लग्जरी कार खरीदी
रामभाऊ अक्सर मेरे घर अपने सहयोगियों के साथ हाउस गार्डन को री-मॉडलिंग करने आता था. एक दिन मैंने उसे अपने सहयोगियों के साथ एक बड़ी कार से उतरकर मेरे घर के गार्डन को ठीक करने जाते हुए देखा. मुझे बाद में पता चला कि उसने नयी गाड़ी खरीदी है. धीरे-धीरे रामभाऊ का कारोबार बढ़ने लगा और आज वो एक माली नहीं बल्कि एक सफल व्यवसायी हैं.

नोबेल प्राइज से सम्मानित एवं बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक के संस्थापक मोहम्मद युनुस कहते हैं “आप सबने बोन्साई का पेड़ देखा होगा , जो जमीन पर उगने वाले की किसी बड़े पेड़ का छोटा रूप प्रतीत होता है . जब आप एक छोटे फूल के बर्तन में एक बड़े पेड़ के अच्छे बीज को बोते हैं, तो आप उस बड़े पेड़ की एक प्रतिकृति छोटे रूप में प्राप्त करते हैं क्योंकि आपने बीज बोने में कुछ गलत नहीं किया, बल्कि आपके द्वारा प्रदान की गयी मिटटी उस बीज के संपूर्ण विकास के लिए अपर्याप्त था. गरीब भी एक बोन्साई की तरह होते हैं उनके बीज में कोई मौलिक विकृति नहीं होती है. केवल हमारा समाज ही उन्हें आगे बढ़ने का अवसर नहीं देता है .”

आज रामभाऊ की पहचान मेरे माली के रूप में नहीं बल्कि वर्ष 2016 के सफल व्यवसायी की है.

– निनाद वेंगुर्लेकर

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