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‘मेरी बच्ची मुझे उस रेप की याद दिलाएगी जिससे मैं बार-बार गुज़री हूं’

Poonam

June 2, 2018

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गुरुग्राम के एक अस्पताल में एक बच्चे को जन्म देने वाली एक किशोरी उसे स्वीकार नहीं कर पा रही है.

लड़की का कहना है कि बच्चे को देखकर उसे उन बलात्कारों की याद आ रही है जिनसे उसे लगातार गुज़रना पड़ा.

इस किशोरी को साल 2016 में गुमला से तस्करी करके गुरुग्राम लाया गया था.

गुरुग्राम के सेक्टर 31 के एक बंगले में नैनी का काम करने वाली इस किशोरी का आरोप है कि बंगले में ही काम करने वाले एक रसोइये ने उससे साल भर बलात्कार किया.

किशोरी और मोहित प्रसाद ठाकुर नाम का रसोइया अपने नियोक्ता के घर में ही रहते थे.

किशोरी का कहना है कि जब भी घर के लोग बाहर होते या वो अकेली होती तो ठाकुर उसका बलात्कार किया करता.

उसका कहना है कि वो बदनामी और काम छूट जाने के डर से ख़ामोश रही.

जिस घर में वो काम कर रही थी उसमें रहने वालों को मार्च में उसके गर्भवती होने का शक़ हुआ. उस समय वो 6-7 महीने की गर्भवती थी.

जब उससे सवालजवाब किए गए तो उसने सारी बात अपने घर के मालिकों को बता दी.

जिसके बाद पुलिस को जानकारी दी गई और भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और 506 के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया.

चिकित्सीय जांच में किशोरी के गर्भवती होने की पुष्टि हुई.

मोहित उत्तर प्रदेश में अपने मूल गांव वापस लौट चुका है और उसे अभी तक गिरफ़्तार नहीं किया गया है.

गुरुवार को किशोरी ने सिविल लाइंस के सामान्य अस्पताल में एक बेटी को जन्म दिया. अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक किशोरी ने अभी तक अपनी बेटी का मुंह भी नहीं देखा है.

अंग्रेज़ी अख़बार द टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए किशोरी ने कहा कि बच्ची उसे उन परिस्थितियों की याद दिला रही है जिनसे वो गुज़री है.

वो कहती है, मैं इसे अपने साथ अपने गांव नहीं ले जा सकूंगी क्योंकि कोई भी ये नहीं समझ पाएगा कि मैं किन हालातों से गुज़री हूं.

ग़ैर सरकारी संगठन शक्ति वाहिनी के संस्थापक रिशिकांत ने कहा, ‘हम उसे परामर्श देने की कोशिश कर रहे हैं. अंततः वो एक मां है. एक बार अगर बच्चे को गोद लेने के लिए भेज दिया गया तो वो फिर उसे वापस नहीं पा सकेगी. पीड़िता इस समय मुश्किल मानसिक स्थिति में हैं. हम उसे कुछ समय देना चाहते हैं ताकि वो सही फ़ैसला ले सके.’

राज्य बाल आयोग से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक यदि पीड़िता अपनी बच्ची को स्वीकार नहीं करती है तो फिर उसे गोद लिए जाने के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा.

शुरुआती जांच में पता चला है कि मूल रूप से झारखंड के गुमला की रहने वाली पीड़िता को साल 2016 में एक एजेंट दिल्ली लेकर आया था और बाद में गुरुग्राम के एक घर में उसे नैनी की नौकरी दी गई थी.

उसके छोटी बहन और मातापिता गुमला में ही रहते हैं और एक ईंट के भट्ठे पर काम करते हैं.

गुरुग्राम आने के बाद से लड़की ने अपने परिजनों से बात नहीं की है क्योंकि उनके पास कोई मोबाइल फोन नहीं है.

उसे नहीं पता कि अब उसका परिवार कैसा है और उसके बारे में उन्हें कोई जानकारी है या नहीं.

पुलिस का कहना है कि नारायाण नाम का एक व्यक्ति मुख्य तस्कर हो सकता है.

वो दिल्ली के शकूरपुर इलाक़े में भारती मेड ब्यूरौ चलाता  था और साल 2013 में तस्करी के एक मामले में वांछित था.

हालांकि लड़की को पीतमपुरा में देवी प्लेसमेंट सर्विस चलाने वाला दीपक लेकर आया था. पुलिस जांच कर रही है कि कहीं दीपक नारायण का सहयोगी तो नहीं है.

स्रोतः द टाइ्म्स ऑफ़ इंडिया

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