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एक रिक्शा चालक जो उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग(U.P.P.S.C) के आकांक्षी भी हैं

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May 12, 2016

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लेख और चित्र का स्रोत: लाल बाबू ललित 

सुबह को टहल कर जब घर वापस जा रहा था तो मेरी नज़र इन भाई साहब पर पड़ी, ये एक रिक्शे के अंदर बैठ कर एक किताब को बड़े ही ध्यान से पढ़ रहे थे, अपनी जिज्ञासा को शांत करने के लिए मैंने इनसे मिलना उचित समझा।

इनका नाम सुनील था और ये एक रिक्शा चालक थे और मूलरूप से लखीमपुर खीरी से आते थे। इन्होंने मुझसे बताया कि वह स्नातक कि पढ़ाई कर चुके हैं और यूपी पी.सी.एस(U.P.P.C.S) की तैयारी कर रहे थे। मैं उनके मुँह से यह सुनकर आश्चर्यचकित रह गया। ये दिन भर आसपास के इलाकों में रिक्शा चलाते थे और अपना खुद का कोई घर ना होने के कारण अपने रिक्शे में ही सोते थे। जब मैंने पूछा कि वो सर्दियों में क्या करते हैं तो उन्होंने हँस कर कहा कि जैसे तैसे काट लेते हैं, काटना ही पड़ता है।

मैंने जानना चाहा कि वो क्यों नहीं कोई किराए का कमरा ले लेते तो उन्होंने कहा, “मेरे साथी रिक्शेवाले ऐसे इलाके में रहते हैं जहाँ शोरगुल बहुत होता है, वो शराब भी पीते हैं और आसपड़ोस वालों से आए दिन कहासुनी और हाथापाई भी करते हैं, मैं ऐसे कमरे और ऐसे लोगों के बीच रह कर क्या तैयारी कर पाऊँगा?” उनका जवाब सुन कर मैंने बस अपना सर हिला दिया।

हमारा संवाद अभी चल ही रहा था कि दो लोग आ गए और उनसे लक्ष्मी नगर चलने को कहा। सुनील ने किताब रखी और मुझसे अलविदा कह कर चल दिए।

मैंने उसी क्षण निष्चय कर लिया कि मैं सुनील की जिस भी प्रकार से मदद कर सकूँगा, करूँगा। मैं उन्हें
ऐसे कठिन इम्तहानों में इस्तेमाल की जाने वाली पुस्तकें और मैगज़ीन देने का इरादा भी कर चूका था।

मैं नहीं जानता कि सुनील इस परीक्षा में सफल होंगे या नहीं पर उनकी लगन और आत्मविश्वास को दुनिया को बताना ज़रूरी था। सुनील जैसे लोग इस बात की मिसाल हैं कि आप जिस भी स्तिथि में हों, अगर आप के अंदर साहस और मज़बूत इरादा है तो आप कोई भी लक्ष्य भेद सकते हैं, कोई भी मंज़िल पा सकते हैं।

-लाल बाबू ललित


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