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हिमांशु बक्शी: छोटे कद और ऊँची उड़ान की अनूठी कहानी

tsgt-superman

May 12, 2016

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“भले ही छोटा है कद, पर ऊँची है सपनों की उड़ान,
अभी तो नापी है मुठ्ठी भर ज़मीन, आगे है पूरा असमान।”

अक्सर हमारा समाज, शारीरिक रूप से विकलांग लोगों को बेकार या समाज के लिए बोझ करार कर देता है। माना जाता है कि ये लोग समाज और देश के विकास में कोई योगदान नहीं दे सकते।मेरा ही उदाहरण ले लीजिए,जब भी मैं घर से निकलता हूँ तो मुझे अनेक प्रकार की कठिनाईयों से गुज़ारना पड़ता है, लोगों के घिनौने तानों का सामना करना पड़ता है। अक्सर मुझे उपहास का पात्र बनाया जाता है। मैंने तो एक तथाकथित शिक्षित महिला को अपने बच्चे से यह कहते हुए सुना कि अगर वह खाना नहीं खाएगा तो वह मेरे जैसा बन जाएगा।

मेरा नाम हिमांशु बक्शी है। मैं एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सी.ए), विधि स्नातक (परिणाम अपेक्षित) एवं वाणिज्य में स्नातक हूँ। इस समय मैं एक बहुप्रख्यात परामर्श संगठन में कार्यरत हूँ। आप सोच रहे होंगे कि मुझमे ऐसी क्या ख़ास बात है? अपनी कमज़ोरी को ताकत में बदल कर सफलता हासिल करने का मैं एक जीता-जागता उदाहरण हूँ। मैंने हमेशा से ही अपनी दृड इच्छा शक्ति और कड़ी लगन पर विश्वास रखा और यह सिद्ध कर दिया कि अगर आपके हौसले बुलंद हों और आपमें दृड इच्छा शक्ति हो तो कोई ताकत आपको नहीं रोक सकती। मेरा मानना है कि एक मज़बूत शरीर होने की बजाए अगर आपमें लगन और हिम्मत है तो आप ज़्यादा शक्तिशाली हैं।

मैं बौनेपन का शिकार हूँ और मेरा कद 3 फुट 8 इंच है, परंतु यह सिर्फ मेरी शारीरिक लम्बाई है, मेरे हौसलों की ऊँचाई पर मेरे कद का कभी कोई प्रभाव नहीं पड़ा। मेरी ज़िन्दगी उतार-चढ़ाव से भरी रही है। जब मैं सी.ए के आखिरी वर्ष में था, तब मैंने अपने पिताजी को खो दिया। वे हमेशा से मुझे एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में देखना चाहते थे और अंततः जब उनका यह सपना साकार हुआ तो वो इस ख़ुशी को बाँटने के लिए मेरे साथ नहीं थे। मेरी माँ मेरे जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा हैं, मुझे अपने काम की अहमियत पता है क्योंकि मैंने 3-3 घंटे खड़े रहकर अपनी परीक्षाएं दी हैं, क्योंकि बेंच मेरे कद से बहुत ऊँची हुआ करती थी।

भगवान आपके साथ सब कुछ बुरा नहीं करता। अगर वो एक हाथ से कुछ लेता है तो उसके बदले दोनो हाथों से कुछ ऐसा लौटाता है जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं करी होगी। मेरे जीवन भी कुछ ऐसा ही है, मैंनै राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य ज्ञान में वाद-विवाद किया है, मैंने कई टी.वी कार्यक्रमों में प्रतिभाग किया है एवं कई समाचार पत्रों के लिए लेख भी लिखे हैं। मैं हर क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणास्पद प्रवक्ता की भूमिका भी निभाता हूँ। मैं गाँधी जी द्वारा दिए गए शब्द, “शक्ति शारीरिक क्षमता से नहीं अपितु अदम्य इच्छाशक्ति से आती है” को बहुत मानता हूँ।

मुझे अत्यंत ख़ुशी होती है जब लोग मेरे पास आते हैं और “सलाम ज़िन्दगी” कहते हैं। इससे पिछली संस्था में मुझे साल के प्रेरणादायक शक्सियत के रूप में सम्मानित किया गया था। प्रख्यात फैशन पत्रिका मैक्सिम ने भी मुझे अपने वार्षिक अंक में स्थान दिया था। मुझे प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह जी एवं अन्य बहुप्रख्यात शख्सियतों से भी सम्मान प्राप्त है।
मुझे आशा है कि मैं जीवनभर लोगों को अपनी कहानी से प्रेरित करता रहूँगा।

-हिमांशु बक्शी


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