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सेना का प्रतिष्ठित स्वोर्ड ऑफ़ ऑनर सम्मान पाने वाली भारत की पहली महिला

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May 13, 2016

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चित्र स्रोत: रेडिफ़| इंडिया टाइम्स | इंडिया टाइम्स | सैनिक समाचार 

कैप्टन दिव्या अजिथ कुमार भारतीय थल सेना की हवाई सुरक्षा विभाग में हैं। वो सेना के इतिहास में पहली ऐसी महिला बनी हैं जिन्होंने वर्ष 2010 में अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी(Officers Training Academy) से स्वोर्ड ऑफ़ ऑनर का खिताब प्राप्त किया। २०१५ के गणतंत्र दिवस के समाहरोह में राजपथ पर उन्होंने १५४ महिला अफसरों और कैडेट्स की परेड का नेतृत्व किया , उस अवसर पर अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा मुख्य अतिथि थे और उन्होंने भी भारत की इस बेटी की वीरता और निडरता को देखा।

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अजिथ २०१० में अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी से ग्रेजुएट हुईं। अपने बैच की सबसे सफल कैडेट होने पर उनको स्वोर्ड ऑफ़ ऑनर का पुरस्कार प्राप्त हुआ, उस साल 244 छात्र अकादमी से पास हुए और इनमें 63 महिलाऐं थीं।

सर्वगुण संपन्न और निडर भी

एक निडर अफसर होने के साथ-साथ अजिथ भरतनाट्यम में भी निपुण हैं और उनको संगीत में भी रूचि है। बास्केटबॉल और डिस्कस थ्रो जैसे खेलों में भी वो सफल रही हैं। अजिथ सर्वप्रथम नेशनल कैडेट कार्प्स से जुड़ीं और फिर अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी से। वर्ष २०१० में उन्होंने सेना की हवाई सुरक्षा विभाग में अपनी जगह बनाई और अब अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी में बतौर शिक्षिका पढ़ाती हैं। अजिथ ने कई विद्यालयों और कालेजों में अपने भाषण से छात्रों को देश की सेवा के लिए प्रेरित किया है और उनको आए दिन शिक्षण संस्थानों में भाषण के लिए निमंत्रण आते हैं और वो सेवा भाव से जाती भी हैं।

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आम तौर पर सेना का नाम आते ही हमारे दिमाग में एक आदमी का ही चित्र आता है पर अजिथ इस चित्र को बदल रही हैं और देश की तमाम महिलाओं को सेना से जुड़ने की प्रेरणा दे रही हैं। सेना से महिलाओं का जुड़ना १९९२ में शुरू हुआ था, जब देश की पहली महिला ने सेना में जाने का निर्णय लिया था, दशकों बाद महिलाओं की तादाद निरंतर बढ़ रही है। भारतीय वायु सेना में सबसे ज़्यादा १३५० महिलाऐं हैं, थल सेना में १३०० और नौसेना में महिलाओं की भागीदारी ३५० के करीब है, यह आंकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है और अजित जैसी महिलाऐं इसको और आगे बढ़ाने में अपना सहयोग दे रही हैं।

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तर्कसंगत अजिथ को उनकी कामयाबी पर ढेरों बधाईयां देता है और उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता है। हम अपनी महिला पाठकों को उनके पद चिन्हों पर चलने के लिए आमंत्रित करते हैं और आशा करते हैं कि वो ना सिर्फ सेना बल्कि जीवन की हर क्षेत्र और कार्यों में मर्दों से कंधे से कंधा मिला कर चलेंगी।


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