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मेरी कहानी: एक ऐसा पल भी था जब मैं अपनी ज़िंदगी को ख़त्म करने के बारे में भी सोचता था

ashu

October 14, 2016

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मैं जब स्कूल में था तो पढाई में उतना अच्छा नहीं था, जब आप पढाई में अच्छे नहीं होते हैं तो आपकी शरारतों और नादानियों पर पर्दा नहीं डाला जा सकता। मैं दूसरे बच्चों जैसा पढ़ने में अच्छा नहीं था, शरारती था, इसलिए स्कूल वालों ने 9वीं कक्षा में मुझे वहाँ से निकाल दिया। मुझे स्कूल से निकालने का एक कारण ये भी था कि कहीं मैं उनके 10वीं के 100% पास आउट का रिकॉर्ड ना ख़राब कर दूँ। उस स्कूल से निकाले जाने के बाद मेरा दाखिला एक सरकारी स्कूल में हुआ और उसी दिन से मैंने ठानी कि मैं दुनिया को बता दूंगा कि मुझ में कितनी काबलियत है।

मैं उस दिन के बाद से दिल लगाकर पढ़ने लगा, मैंने 10वीं कक्षा को फर्स्ट क्लास से पास किया और 12वीं में मैंने अपनी कक्षा में टॉप किया। इसके बाद मुझे कॉलेज में दाखिला मिला और वहाँ मैंने अपने अंदर के एक दूसरे पहलू को जाना, मैं खेल-कूद और ऐसी गतिविधियों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने लगा। मुझे खेलों में कई सारे अवार्ड और मेडल भी मिले और सबसे बड़ी बात ये थी कि मुझे स्टूडेंट कौंसिल का प्रेसिडेंट चुना गया।

2011 में बांग्लादेश में आयोजित एशियाई कराटे चैंपियनशिप में मैंने अपने देश के लिए गोल्ड मेडल जीता और ये मेरी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा पल और सबसे बड़ी ख़ुशी थी। अपने देश के लिए कुछ जीतने में जो गर्व आपको महसूस होता है ना, वो किसी और चीज़ में हो ही नहीं सकता है। उसके बाद से मेरी ज़िंदगी बदल गई, मुझे कई जगह से निमंत्रण आने लगे, कोई मुझे होटल के उद्घाटन के लिए बुलाता तो कोई बतौर मुख्य अतिथि।

मेरी कामयाबी के बाद मुझे मेरे स्कूल से, जहाँ से मुझे निकाला गया था, उनके स्कूल के ओल्ड स्टूडेंट्स एसोसिएशन का जनरल सेक्रेटरी बनने का निमंत्रण आया। वो पल था जब मुझे लगा कि मैंने शायद सच में कुछ हासिल कर लिया है और अपने आप को साबित कर दिया है। मुझे लगता है कि अगर हमारे साथ ज़िंदगी में कुछ बुरा होता है तो इससे हमें मायूस नहीं होना चाहिए, हिम्मत नहीं हारना चाहिए। अगर मुझे उस स्कूल से नहीं निकाला जाता तो शायद मैं पढाई और ज़िंदगी को लेकर इतना संजीदा नहीं होता, ज़िंदगी में आने वाली हर तकलीफों का एक फ़ायदा यह होता है कि वो आपको मज़बूत बनाती हैं।

अब मैं पीछे देखता हूँ तो उन लोगों का धन्यवाद करता हूँ जो मुझे हारा हुआ समझकर चिढाते थे, मेरा मज़ाक बनाते थे, अगर उन लोगों ने मेरी हार का मज़ाक नहीं बनाया होता तो मैं कभी आगे ही नहीं बढ़ पाता। मुझे ख़ुशी होती है जब लोग मेरी उपलब्धियों की सराहना करते हैं, लेकिन मैं ये भी जानता हूँ कि ये बस शुरुवात है, अभी तो पूरी ज़िंदगी पड़ी है, अभी तो बहुत सारी सफलताओं और असफलताओं का स्वाद चखना बाकी है। असफलता के बाद मिली सफलता का स्वाद ही अलग होता है, ये मैं अपने अनुभव से कह सकता हूँ।

मेरी ज़िंदगी में एक ऐसा समय भी आया था जब मैं अपने आप को किसी चीज़ के लायक नहीं समझता था, एक ऐसा पल भी था जब मैं अपनी ज़िंदगी को ख़त्म करने के बारे में भी सोचता था। लेकिन आज, आज मुझे स्कूल और कॉलेज वाले अपने बच्चों का मार्गदर्शन करने, उन्हें प्रेरणा देने के लिए बुलाते हैं। मैं ये सब बातें आपको इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि ये अकेले मेरी कहानी नहीं है, हर इंसान की कहानी ऐसी ही होती है, उसकी ज़िंदगी में ऐसे ही परेशानियां और मुसीबतें आती हैं, असफलताएं मिलती हैं पर आपको उम्मीद नहीं हारनी चाहिए। अगर आपको अपने ऊपर यकीन है, अपने सपनों के ऊपर यकीन है तो कोई भी ताक़त आप से आप का सपना नहीं छीन सकती है, आपको कामयाब होने से नहीं रोक सकती है।

-सलीम जावेद द्वारा भेजी गई।


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