ज़ारा शेख़

मेरी कहानी

मैं एक चर्चित एमएनसी में एचआर बनी पहली ट्रांस्जेंडर हूं

तर्कसंगत

June 13, 2017

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पुरुषों की तरह रहो. जब मैं बड़ा हो रही था तो ये बात मेरे कानों में पड़ती रहती थी. लेकिन मुझे चमकीले रंग पसंद थे, कलाकारी पसंद थी और लड़कियों की तरह तैयार होना पसंद था.

स्कूल में सभी मेरा मज़ाक बनाते और मेरे सहपाठी मुझपर हावी होने की कोशिश करते. कभी कभी मेरे लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल भी किया जाता. बचपन में मेरी दोस्ती सिर्फ़ लड़कियों से होती थी और मैं कभी लड़कों के साथ नहीं खेलता. मेरे पिता घर पर इस बात को लेकर मुझे बहुत डांटते थे. लेकिन मैंने कभी खुद को नहीं बदला. वो मुझसे हमेशा कहते कि मैं एक दिन परिवार का नाम बदनाम करूंगा.

मैं पढ़ाई में हमेशा अच्छा रहा और स्कूल में हमेशा शीर्ष तीन रैंकों में आता लेकिन कॉलेज में रैगिंग की वजह से मैं बहुत एकाकी हो गया और गुमसुम रहने लगा. मेरा व्यावहार लड़कियों जैसा था और सभी मेरी मज़ाक बनाते थे, मेरे लिए नए-नए नाम रखे जाते और मेरी नकल उतारी जाती.

घर पर मैं अकेले में साड़ी पहनता और मेक अप करता. एक दिन मेरे पिता ने मेरे कपड़ों में आग लगा दी और मेरा मेक अप बॉक्स जला दिया. आज भी मेरे जेहन में उस दिन कि यादें ताज़ा हैं.

कॉलेज में मेरा दूसरा साल था जब हमारे प्रोफ़ेसर ने जेनेटिक डिसआर्डर और हार्मोंस के बारे में पढ़ाया. मैंने घंटों तक इंटरनेट पर सर्च किया और ट्रांस्जेंडर्स के बारे में पढ़ा. अचानक मुझे सबकुछ समझ आने लगा. मैंने अपने भीतर की महिला को पहचान लिया. हालांकि मेरा परिवार कभी भी इस बात को समझ नहीं पाया.

दो साल पहले मैंने अपनी पहचान सार्वजनिक करने का फ़ैसला लिया. मैं अब बहुत दिन इस झूठ में नहीं रह सकती थी. मेरा परिवार मेरे साथ नहीं था तो मैंने घर छोड़ने का फ़ैसला लिया. वो मेरी यात्रा की शुरुआत थी. शुरुआत में मुझे डर लगा रहता था कि लोग मुझे स्वीकार करेंगे या नहीं. लोग कैसे व्यवहार करेंगे. मैं बहुत नर्वस रहती थी.

अगली चुनौती नौकरी पाने की थी. मैंने बहुत से साक्षात्कार दिए लेकिन अपने बारे में सबकुछ बताए. फिर एक दोस्त ने बताया कि एक नौकरी है जो सिर्फ़ ट्रांस्जेंडरों के लिए है. मैंने तुरंत साक्षात्कार दिया. आज में एक एमएनसी में पहली ट्रांस्जेंडर एचआर एक्ज़ीक्यूटिव हूं. ये कंपनी सच में जीवन बदलने में यक़ीन रखती है. नौकरी के पहले दिन मैं बहुत नर्वस थी लेकिन अब मुझे कोई डर नहीं है. मैं अब महिला शौचायल इस्तेमाल करती हूं. ये मेरे लिए बड़ी स्वीकार्यता है.

मैं एक लंबी दूरी के रिश्ते में हूं और बहुत जल्द ही उनके परिजनों से भी मिलूंगी. मैं उम्मीद करती हूं कि वो मुझे स्वीकार करे और मैं जैसी हूं वैसी को ही प्यार करें.

मैं निशांत नाम के साथ पैदा हुई थी और आज मैं ज़रा शेख (मिस्र भाषा में राजकुमारी के लिए एक नाम) हूं. आज मेरे अंदर दुनिया को जीत लेने का आत्मविश्वास है.

-ज़ारा शेख़

Story By – BeingYou | PC: Khan and Baker


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