डॉ. ज्योति लांबा

मेरी कहानी

मेरी कहानीः मुझे गुजरात के 34 गांवों में 6 हज़ार शौचालय बनवाने में चार साल लग गए

तर्कसंगत

June 15, 2017

SHARES

बीते तीन दशकों से, मैं शहर के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में से एक में प्रोफ़ेसर हूं. छात्रों को पढ़ाना और उनसे बात करना मुझे ख़ुश करता है. मेरा जीवन भी उनके इर्द गिर्द ही घूमता है. फिर मैंने 2013 में गांधी पदयात्रा में हिस्सा लिया और सबकुछ बदल गया. हमारे विश्वविद्यालय ने ही गांदी पदयात्रा का आयोजन किया था जिसके तहत छात्र और शिक्षक गांव जाते हैं और वहां कि समस्याओं को समझते हैं.
गांव-गांव जाने के दौरान मैंने देखा कि गांवों में शौचालय ही नहीं हैं और सबसे ज़्यादा परेशानी महिलाओं को होती है. महिलाओं को शाम होने का इंतेजार करना होता है, जब अंधेरा छा जाता है तब ही वो बाहर पेशाब करने जाती हैं. ये सब देखकर मुझे बहुत दुख हुआ. जब हम पदयात्रा से लौट आए तब हमारे कुलपति डॉ सुदर्शन इयंगर ने मुझसे गांवों में शौचालय बनवाने की योजना पर काम करने के लिए कहा. मेरे लिए ये देश सेवा करने और धरती मां को स्वच्छ करने का एक बड़ा मौका था. मैंने तुरंत हां कर दी.
2013 में मैंने गुजरात के गांवों के लोगों को शौचालय बनाने के लिए प्रेरित करना शुरू किया. लोग बहुत  जागरुक नहीं थे और उन्हें शौचालय बनवाने के लिए मनाना बहुत मुश्किल था. एक महिला होतो हुए मेरे लिए पुरुषों को शौचालय के फ़ायदे समझाना भी कठिन था. मुझे लोगों को सरकारी योजना के तहत शौचालय बनवाने के लिए राज़ी करने में सात महीने लग गए.
मैं चार साल से ये काम कर रही हूं और इस दौरान मैंने गुजरात के 34 गांवों में छह हज़ार शौचालय बनवा दिए हैं. मैंने कई गांवों में शौचालय बनवाने की प्रतियोगिता भी शुरू की और ईनाम अपनी व्यक्तिगत बचत से ख़रीदकर दिए. ऐसा करने के लिए मुझे अपने खर्चे थोड़े कम करने पड़े.
कभी कभी लोग मुझ पर यह कहते हुए हंसते हैं कि देखो ये प्रोफ़ेसर कितने छोटे काम कर रही है. लेकिन मेरा काम जारी है क्योंकि उन लोगों के लिए ये एक छोटा काम हो सकता है, मेरे लिए यही राष्ट्रसेवा है.
कोई संदेश?
जो आपको पसंद है वो करिए बिना ये इसकी परवाह किए कि बाकी लोग क्या सोचते हैं. जब सरकार और नागरिक मिलकर काम करते हैं तब ही विकास होता है. सरकार अकेले सबकुछ नहीं कर सकती है. हमें सहभागिता करनी होगी और देश को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाना होगा.
डॉ. ज्योति लांबा

Story By – Pray Bavishi | Humans Of Amdavad


Contributors

Edited by :

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...