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दंतेवाड़ाः आदिवासी विधवा के बेटे ने आईआईटी परीक्षा पास की

तर्कसंगत

June 16, 2017

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हमारे इर्द गिर्द प्रेरणादायक कहानियों की कोई कमी नहीं है. जब हम अपनी परेशानियों में बुरी तरह फंस जाते हैं और कोई रास्ता नहीं समझ आता तो ऐसी कहानियां हमारे लिए प्रेरणा बनती हैं जो हमें ये सिखाती हैं कि इस दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने अपनी जिंदगी से संघर्ष कर आसानी से कठिनाईयों का सामना कर वो मुकाम हासिल किया जिसके वो काबिल हैं.

ऐसी ही एक कहानी है वमन मांदवी की जो छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा के किरनदुल गांव का आदिवासी है, जिसने ये साबित किया की अगर आपके हौसले बुलंद हैं तो आपका सपना जरुर साकार होगा. सच्ची लगन, निष्ठा और दृढ़ता के कारण ही वमन ने आईआईटी का एग्जाम पास किया.

हालांकि वमन की जिंदगी कुछ और ही होती अगर उसे अपनी मां का पुरा साथ ना मिला होता. मंगाली मांदवी जो वमन की मां हैं वो दिन रात कड़ी मेहनत से लकड़ी बेचकर घर की जरुरतों को पुरा करती हैं.

वमन के जन्म के दस महीने बाद ही उसके पिता का देहांत हो गया था और तब से घर की पुरी जिम्मेदारी उसकी मां के कंधे पर है.

लेकिन मंगाली मांदवी ने कसम खायी थी की अपने बच्चे को किसी भी किमत पर शिक्षा का आभाव नहीं होने देंगी. वो जानती थी कि उन जैसे पिछड़े लोगों को जिंदगी में कुछ अच्छा करने के लिए बहुत पापड़ बेलने होंगे. फिर भी उन्होने ये अत्यंत कठिन जिम्मेदारी अपने कंधे पर ली.

“मेरे पति की मौत के बाद मैने लकड़ीयां बेचकर अपने बेटे की परवरिश की है. मेरी हमेशा से ये ख्वाहिश रही की मैं बेटे को अच्छी शिक्षा दूं ताकी वो बड़ा आदमी बन सके. मैं एक आदिवासी समाज में रहती हूं जहां बच्चों को गाय चराने को दी जाती है जिससे वे पढ़ नहीं पाते. लेकिन मैने इसकी जगह वमन के हाथ में कलम थमाया.” ये बाते उन्होने समाचार एजेंसी एएनआई से कही.

वमन ने अपनी मां को बिल्कुल भी निराश नहीं किया. उसने कड़ी मेहनत कर हाई स्कूल में 72 फिसदी और इंटरमिडीएट में 76 फिसदी अंक प्राप्त किये. और आईआईटी पास कर उसने एक सराहनीय उपलब्धि हासिल की है.

वमन अपनी मां के संघर्ष के लिए नतमस्तक है औऱ उसकी कोशिश है कि वो अपनी मां का नाम और रौशन करे.

सरकार के मुफ्त शिक्षा अभियान को सराहनीय बताते हुए मंगाली मांदवी ने जिला प्रशासन के सहयोग और सहभागिता का भी शुक्रिया अदा किया जिसकी वजह से उनके बेटे ने सही मार्ग का चयन कर सफलता हासिल की.

तर्कसंगत की टीम इन मां बेटे को सलाम करती है जिन्होने अथक प्रयास से अपने सपने को हकीकत में बदला. इनकी कहानी समाज के हर उस तबके को प्रेरित करती रहेंगी जो आज भी गरीबी और पिछड़ेपन से जूझ रहै हैं.


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