मेरी कहानी

मेरी कहानीः मेरा हमेशा काली कलूटी कहकर मज़ाक बनाया गया

तर्कसंगत

June 16, 2017

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जब मैं बड़ी हो रही थी तो मुझसे हमेशा कहा जाता कि गोरी लड़कियां ही सुंदर होती हैं.

मेरे रंग का मज़ाक उड़ाया जाता और सब मुझे काली कलूटी कहते. मेरा आत्म सम्मान डगमगा गया.

जब मैं बहुत छोटी थी तो मेरी नानी चाय पीने के लिए मना करतीं क्योंकी उनका मानना था कि इससे मैं और काली हो जाउंगी. मैं जहां भी जाती लोग मुझे इस बात की सलाह देने लगते की मैं अपनी स्कीन को कैसे रखूं जिससे मै सुंदर दिखुं.

मुझे स्कुल में किसी भी नाटक में मुख्य भुमिका निभाने को नहीं मिली क्योंकी किसी को भी काली नायिका पसंद नहीं. मुझे हमेशा कृष्णा का रोल मिलता राधा का नहीं क्योंकि मैं काली थी.

बच्चे मुझे भद्दी बातें कहते और इतना मजाक बनाते कि मैं खुद को कुरुप लगने लगी. मेरे चचेरे भाई-बहन को गोरोपन का इतना जुनून सवार था कि वो टेलकम पाउडर से चेहरा पोत लेते जिससे वो भूत जैसे दिखने लगते.

लोग पूछते हैं क्या तुम मद्रासी हो?

तीन दशक से मेरा घर दिल्ली है. कई लोग मुझसे पुछते हैं, क्या आप मद्रासी हो? ये दिल्ली वालों का किसी भी साउथ इंडियन को पुछने का पसंदीदा तरीका है. आज भी ब्यूटी पार्लर में मुझे फेयरनेस फेसियल के लिए पुछा जाता है और हद तो तब हो गई जब पिछले साल मेरी शादी थी और सबके पास मुझे ब्राइडल ग्लो देने के लिए कुछ न कुछ उपाय थे.

ट्रायल के दौरान मेक अप आर्टिस्ट ने मेरे रंग से तीन गुणा गोरा कर दिया, यहां तक की डिज़ायनर ने मुझे ऐसे रंग के कपड़े बताये जिससे मैं ज्यादा गोरी और सुंदर लगुं.

अब तो 2107 भी आ गया लेकिन गोरेपन का जुनून वैसे ही बरकरार है. मैट्रीमोनियल के विज्ञापन आज भी गोरे और सुंदर को ही महत्व देते हैं शिक्षा या परिवार की जगह.

आज के भारत में कम उम्र की लड़कियां फेयरनेस प्रोडक्ट से बुरे तरीके से प्रभावित हो रही है.

मैं गोरा करने की क्रीम के बहकावे में नहीं आई

मैं अपनी मां की शुक्रगुजार हूं, जिन्होने मुझे हमेशा सिखाया की तुम जैसी भी हो खुद पर गर्व करो और मै खुश हूं की फेयरनेस क्रीम के बहकावे में कभी नहीं आई. आज मैं खुद को पसंद करती हूं और वहीं फोकस करती हूं जो मुझे करना अच्छा लगता है.

आज मैं एक सफल संगीतकार और वॉइस ओवर आर्टिस्ट होने के साथ-साथ एक एंकर भी हूं. सभी ने मुझे संगीतकार बनने से मना किया क्योंकि मैं एक आरामदायक कॉरपोरोट नौकरी कर रही थी.

इस इंडस्ट्री में किसी ने आज तक मेरे रंग को लेकर कुछ भी नहीं कहा और चेहरे को लेकर तो बिल्कुल भी नहीं. कभी कभी मुझे मॉडलिंग करने को भी मिल जाता है जो कि खुद में एक अलग कहानी बयां करती है.

जहां मेरा रंग एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है. कभी मुझे अपने रंग के कारण ही काम मिल जाता है और कभी इसी के कारण नहीं मिलता.

पहली बात मैं बिल्कुल छरहरी काया वाली मॉडल नहीं और मैं काली भी हूं. मैं ये दावे के साथ कह सकती हूं की मेरी तस्वीरें एयरब्रश्ड हैं लेकिन मैं इसके लिए कुछ कर नहीं सकती. मॉडलिंग इंडस्ट्र थोड़ी निर्दयी हो सकती है.

Story By –  BeingYou

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