मेरी कहानी

मेरी कहानी : शायद हमारा अपना घर न हो, हम अपनी जरुरतें भी पुरी नहीं कर पायें लेकिन हम आपस में एक दूसरे से बेइंतेहा मोहब्बत करते हैं.

Poonam

June 20, 2017

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हमारी जिंदगी में परेशानियां बेशुमार थी लेकिन हम इसे ईश्वर का दिया एक छोटा सा तोहफा समझते थे. शुरुआत एक मुस्कुराहट के साथ हुई थी. हमें एक दूसरे से पहली नज़र में ही प्यार हो गया था. वो एक दिहाड़ी मजदूर था जो निर्माणाधीन इमारत में काम करता था और मैं भी वहीं काम करती थी. काम के दौरान हमारी कुछ मुलाकातें हुईं लेकिन काम के बाद घर लौटते वक्त हमारी नजरें मिली. हमें कुछ पता नहीं हमारे बीच क्या चल रहा था लेकिन हम दोनों एक दूसरे को देख कर हमेशा मुस्कान बिखेर देते थे. ये बहुत दिनों तक यूं ही चलता रहा. हमारे बीच बात तब हुई जब मुझे किसी दूसरी जगह काम पकड़ना था औऱ हमने ये तय किया की हम कहीं आस पास ही रहें. हमारे रास्ते वहां से अलग हो गये लेकिन काम के बाद हमेशा वो मेरे पास आता और हम घर एक साथ जाते. सबसे मजेदार बात ये थी कि हमने कभी आपस में बात नहीं कीहम दोनो ही एक दूसरे से बात करने में बहुत शर्माते थे. हमारे परिवार के लोगों की आपस में पहले से ही पहचान थी और हमने सबकी रजामंदी से शादी करने का फैसला कर लिया. शादी के बाद भी हम निर्माणाधीन जगहों पर काम करते रहे लेकिन जब मैं मां बनने वाली थी तो डॉक्टर ने मुझे पूरे 8 महीने तक आरान करने की सलाह दी क्योंकि मैं बीमार हो गयी थी. वो मेरा बहुत ख्याल रखते थे और लंच ब्रेक के दौरान भी मुझसे मिलने आ जाया करते थे.

हमलोग अपनी छोटी सी दुनिया में बहुत खुश थे लेकिन बच्चा होने के बाद हमें छोटी मोटी जरुरतों के लिए भी बहुत संघर्ष करना पड़ा. वो ओवरटाइम करते, तीन शिफ्टों में काम करते ताकि ज्यादा से ज्यादा पैसे कमा सकें.

बाद में मैने फूल बेचने का काम शुरु कर दिया और साथ ही बच्चों की भी देखभाल करती थी. हमारी जिंदगी में बहुत ही उतार चढ़ाव आये और खास कर सबसे छोटे बच्चे के ईलाज के लिए हमें पैसे बचा कर रखने पड़े. हम दोनों ने दिन रात कड़ी मेहनत की, भूखे रहे ताकि हमारे हमारे बच्चे पेट भर खाना खा सकें.

कुछ दिनों पहले की बात है जब मेरे पति बिमार थे फिर भी वो डबल शिफ्ट कर रहे थे हमारी जरुरतों को पुरी करने के लिए, लेकिन दुर्भाग्यवश एक दिन उनका एक्सिडेंट हो गया और वो काम पर नहीं जा सकते थे. अब मैं उनकी जगह काम कर रही हूं, लेकिन एक औरत होने के कारण मुझे कम पैसे मिलते हैं वहीं मैं ये काम बहुत पहले ही छोड़ चुकी थी तो मेरे लिए निर्माणाधीन इमारतों में काम कर पाना मुश्किल है. हमलोग छोटी छोटी जरुरतों के लिए काफी जुझ रहे हैं लेकिन ये हमारा प्यार है जो हमें लगातार हिम्मत देता है.

मुझे याद है पिछले साल जब मेरे पति बिमार हुये थे तो हमने वो भी दिन देखे थे जब हमें  भूखे सोना पड़ा था. बरसात के उन दिनों में हम कंधे पर सर रख कर एक दूसरे का सहारा बन जाया करते थे. एक बड़ा पाव से ही हमें गुजारा करना पड़ रहा था. शायद हमारा अपना घर न हो, हम अपनी जरुरतें भी पुरी नहीं कर पायें लेकिन हम आपस में एक दूसरे से बेइंतेहा मोहब्बत करते हैं. हमें अपनी छोटी हंसती खेलती दुनिया से बहुत प्यार है और हमने अपने छोटे से स्वर्ग को ऐसा बना लिया है जहां दुनिया की कोई भी भौतिक वस्तु जैसे घर, खाना, पैसा मायने नहीं रखता बस प्यार बसता है . हमारी बस यही आशा है कि हमारे बेटे को अच्छा ईलाज मिले वो जल्दी से ठीक हो जाये और हमारी जिंदगी वैसे ही पटरी पर आ जाये. खुशियां बांटने में क्या आनंद है ये हम सभी जानते हैं तभी तो सभी इसी की दुआ करते हैं.”

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