ख़बरें

हल में जुत रहे किसान की मदद को दौड़ा प्रशासन

Poonam

June 21, 2017

SHARES

“मेरा मालिक हल में जुतता है, उनका कंधा छिल जाता है. हमारे पास कुछ नहीं हैं, हम बहुत मजबूर हैं.”

मुन्नी देवी खेत में हल थामती हैं. लेकिन उनके हल को बैल के बजाए उनके पति खींच रहे हैं.

बिजनौर के सालमाबाद गांव की मुन्नी देवी की व्यथा यह है कि उनके परिवार के पास सिर्फ़ एक ही भैंसा है और हल के जुए में जुतने के लिए दो भैंसों या बैलों की ज़रूरत है.

दूसरे की कमी उनके पति सीताराम पूरी करते हैं जो भैंसे के साथ हल में जुतते है.

लेकिन 8 बीघा ज़मीन के मालिक किसान सीताराम की मुश्किलें इससे कहीं ज़्यादा है. दो बार उनके ईख के खेत में आग लग गई लेकिन प्रशासन की ओर से कोई मुआवज़ा नहीं मिला.

तर्कसंगत से बात करते हुए सीताराम कहते हैं, “यहां बहुत मुश्किल है. फ़सल जानवर चर जाते हैं. दो बार खेत में आग लग गई, कुछ हाथ नहीं आया. आधार कार्ड नहीं है इसलिए पेंशन भी नहीं बन पा रही है.”

किसान सीताराम का एक हाथ कुट्टी मशीन में आने से कट गया था जिस वजह से उनका आधार कार्ड नहीं बन पाया और इससे उनकी पेंशन पर भी ख़तरा पैदा हो गया.

भर्राई आवाज़ में मुन्नी देवी कहती हैं, “मैंने अपने जीवन में कोई सुख नहीं देखा. ग़रीबी के कारण बच्चों की पढ़ाई छूट गई और उन्हें मज़दूरी में झोंकना पड़ा.”

वो कहती हैं, “हमें मदद की बहुत ज़रूरत है लेकिन कोई हमारी सुध नहीं ले रहा है.”

सरकार किसानों और ग्रामीण गरीबों की मदद के लिए कई तरह की योजनाएं चलाती है लेकिन इस किसान परिवार का आरोप है कि उसे कभी भी किसी भी तरह की मदद मुहैया नहीं कराई गई.

सरकारी मदद

बेहद मुश्किल हालात में जी रहे इस किसान परिवार की स्थानीय अख़बार में तस्वीर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने मदद की है.

बिजनौर के डीएम जगतराज त्रिपाठी ने बताया, “हमने परिवार की मुश्किलों का संज्ञान लिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी किसान की हर संभव मदद करने के लिए कहा है. ”

वहीं केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के आदेश पर किसान का आधार कार्ड भी तुरंत बनवा दिया गया. ज़िला प्रशासन अब उन्हें सरकारी सहयता से आवाद और अन्य सुविधाएं देने के लिए काम कर रहा है.

क्या फौरी मदद से किसानों की हालत सुधरेगी

तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बिजनौर के किसान सीताराम की प्रशासन ने फ़ौरी मदद कर दी है. लेकिन क्या इससे किसानों की हालत बदलेगी.

वरिष्ठ पत्रकार पी साईंनाथ के मुताबिक हाल के सालों में खेती में लागत के मुकाबले किसानों की आमदनी बेहद घटी है. कई बार तो किसानों को नुक़सान तक झेलना पड़ता है.

बिजनौर के सीताराम भारत के किसानों की बेबसी का प्रतीक हैं. देश के लिए ये सोचने का विषय है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, जिसे खेती के मामले में उन्नत माना जाता है, एक 8 बीघा ज़मीन का मालिक किसान यदि पैसा नहीं जोड़ पा रहा है तो फिर खेतिहर मज़दूरों या बटाई किसानों की हालत क्या होगी.

कर्ज़ माफ़ी

हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सरकारों ने किसानों का कर्ज माफ़ किया है. पंजबा सरकार ने भी किसानों के कर्ज माफ़ करने का ऐलान कर दिया है. लेकिन सरकार के इन क़दमों से किसानों को फ़ौरी राहत तो मिलती है लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं होता.

सरकार को किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए हस्तक्षेप करना होगा और सुनिश्चित करना होगा कि किसानों को उनकी लागत और मेहनत के हिसाब से आमदनी मिले.

Pictures: bbchindi.com

 


Contributors

Edited by :

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...