मेरी कहानी

मेरी कहानी: बेटे की सफलता के लिए मैने उसके पिता को हर रोज़ शिद्दत से साईकिल ठीक करते देखा है.

Poonam

July 3, 2017

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मेरी कहानी: बेटे की सफलता के लिए मैने उसके पिता को हर रोज दिन भर शिद्दत से साईकिल को ठीक करते देखा है. वो अपने बेटे की उपलब्धि को बयां करते वक्त गौरवानवित महसूस करते हैं.

मैं अपनी बाइक साफ कर रहा था तभी एक साईकिल रिपेयर करने वाला जिसे मैं पहले से जानता था मेरे पास आया और कहा की मेरे बेटे ने 10वीं के परीक्षा में 410/500 अंक प्राप्त किये. उसके चेहरे से उसकी खुशी झलक रही थी. मैने तुरंत उसे बधाई दी और उसके बेटे को घर पर लाने को कहा.

उसका बेटा किशोर जब मेरे पास आया तो मैं उसे देखकर हैरान रह गया क्योंकि मैने उसे हमेशा सड़क किनारे खेलते देखा है और मैं भी कभी कभी उसके साथ खेलने लग जाया करता था. मुझे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि किशोर उस व्यक्ति का बेटा है. उसने मेरे पास आकर मुझसे पूछा की क्या आपने मुझे पहचाना ? मैं उसे अपने कमरे में ले गया और करीब आधे घंटे तक मैंने उससे कई बातें की जिसमें उसके दोस्त, परिवार, उसका जुनून, उसके लक्ष्य के बारे में जाना. मैं दावे के साथ कह सकता हूं की वह काफी होशियार है जो बातें बहुत अच्छी करता है पर दुर्भाग्यवश वह इंग्लिश में बातें नही कर सकता है। फिर मैंने उसे लंच करवाया और जहां उसने अपने पारिवारिक हालात के बारे में बताया जो वाकई में मार्मिक था.

उसने मुझसे भी पूछा की कैसे मैने 10 वीं के इग्जाम में अच्छे अंक प्राप्त किये तो मैने कहा की मुझसे ना ही पूछो तो बेहतर है (मेरे दोस्त ही जानते हैं की मैने कितनी मेहनत की थी). फिर उसने मुझसे मेरे भविष्य के बारे में भी पूछा और स्कूल की कुछ घटनायें याद कर हम काफी हंसे भी.

मुझे किशोर से बातें करके बहुत अच्छा लगा इसलिए मैने उसे अपना नंबर भी शेयर किया और उससे कहा की छुट्टी में मुझे कॉल कर लिया करे ताकि मैं उसे इंग्लिश पढ़ा सकूं साथ ही और भी विषयों में मदद कर सकूं. यही नही मुझे भी बहुत कुछ सिखने को मिला.

  1. खुशीमैं देखता हूं उसके पिता को हर रोज दिन भर कड़ी धूप में शिद्दत से साईकिल ठीक करते और जब वो अपने बेटे की उपलब्धि को गर्व से कहता है तो उसकी चेहरे पर एक शिकन भी नहीं होता, कोई कष्ट नहीं और परेशानी भी नहीं.
  2. आत्मविश्वास से लवरेज होना- किशोर बात करने में कभी संकोच नहीं करता. वो बिना किसी झिझक के बिंदास तरीके से अपने दिल की बातें रखता है ठीक मेरी तरह.
  3. दीर्घकालिन लक्ष्य- मैं उसे जांचना चाहता था इसलिए मैने उससे पूछा की क्या तुम गर्लफ्रेंड बनाना नहीं चाहते और दारू-सिगरेट कुछ का तो शौक होगा. उसका जवाब बड़ा ही मजेदार था. वो कहता है बड़े भाई लड़की तक तो बात ठीक है पर दारू-सिगरेट कभी नहीं क्योंकि मैं नहीं चाहता की मेरी वजह से मेरे पूरे परिवार को परेशानी हो. मुझे लगता है कि उसे एक अच्छी जिंदगी मिले क्योंकि वो उसका हकदार है.

वेदांत लुनिया


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