मेरी कहानी

मेरी कहानी : मुझे गिरता देख वो मेरे करीब आया और मुझे उठाने की बजाय वह मेरी टूटी चप्पल ले कर गेट की तरफ भाग गया

तर्कसंगत

July 6, 2017

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आठ साल पहले हमने प्रेम विवाह किया था. चिड़ियाघर में हुई वो पहली मुलाकात आज भी हमारे लिए कुछ खास है.पहली नज़र में वो मुझे थोड़ा ज़ाहील इंसान लगा.बंदरों को खिलाने के लिए मैं कुछ मूंगफली लेकर आई थी क्योंकि मैं नज़दीक जाने से डर रही थी इसलिए मैने उसे खिलाने को दे दी.

वो नज़दीक गया और बंदरों को देखतेदेखते सारी मूँगफलियाँ खुद ही खा गया. ये देख मुझे बहुत गुस्सा आया और मैंने पूछा कि तुम ऐसा कर भी कैसे सकते हो? उसने मासूमियत से जवाब दिया कि मूँगफलियाँ उसे पसन्द हैं. मेरा गुस्सा सातवें आसमान पर था. मैं उसे वहीं छोड़ कर चल पड़ी लेकिन जल्दबाज़ी में गिर पड़ी और मेरी चप्पल टूट गयी. मुझे गिरता देख वो मेरे करीब आया. मैं अपने पैरों की चोट ही देख रही थी कि उसने मेरी टूटी चप्पल उठा ली. मुझे उठाने की बजाय वह चप्पल ले कर गेट की तरफ भाग गया.

जब मैंने पाया कि मैं चिड़ियाघर में नंगे पाँव अकेली पड़ी हूँ तो मुझे खुद पर गुस्सा आया. किसी तरह उठकर मैं पास के बेंच पर बैठ गयी। सोचती रही कि नंगे पाँव घर कैसे जाऊंगी. मैं उठ कर चलती इससे पहले वो मेरे सामने खड़ा था. उसने मेरी चप्पलें मेरे पैरों के सामने रख दीं.

मैंने देखा, वो पसीने में लथपथ था, लम्बीलम्बी सांसें लेते हुए वो मुझे देख मुस्कुरा रहा था. उस पल मुझे एक अजीब किस्म का प्यार महसूस हुआ. तब से लेकर आज तक आठ सालों से मैं इस पागल इंसान के साथ प्यार में हूँ. इसने या तो मुझे सिर्फ हँसाया है या फिर सिर्फ गुस्सा दिलाया है, इतने सालों में इसने यही किया है.

हम दोनों एक ही कारखाने में काम करते हैं. रोज़ शाम लौटते वक्त वह एक जंगली फूल तोड़ लेता है, पर मुझे देता कभी नहीं. हमारी बिटिया ने पानी की अपनी सुराही से एक गुलदस्ता बनाया है जिसमें मेरे पति रोज़ काम से लौटते ही वो फूल सजा देते हैं. उसे देख मेरी बेटी चीखते हुए कहती हैमाँ, देखो ये तुम्हारे लिए है.” अक्सर मैं कोई जवाब नहीं देती, शर्मा जाती हूँ. मैं उसके लिए ज्यादा कुछ नहीं कर पाती पर हमेशा घर पर मूँगफलियाँ ज़रूर रखती हूँ.

GMB AKASH


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