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अपनों से हारकर और अपमानित होकर भी देश के लिए सिल्वर जीता

तर्कसंगत

July 13, 2017

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क्रिकेट के अलावा और खेलों के साथ सौतेला व्यवहार होना तो हमारे देश में आम बात है पर बर्लिन से ऐसी खबर आई है जिसे जानकर आपका सिर शर्म से झुक जाएगा. देश में खिलाड़ियों से हर प्रतियोगिता में जीत और पदक की उम्मीद की जाती है. लेकिन कई बार खिलाड़ी सुविधाओं के नाम पर खुद को ठगा हुआ सा महसूस करते हैं.

पैरा स्वीमिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेने गईं भारतीय पैरा एथलीट कंचनमाला पांडे को उधार मांगने को मजबूर होना पड़ा. दरअसल सरकार ने जो सहायता राशि उनके लिए भेजी थी, वो उनतक पहुंची ही नहीं. पैसा ना होने की वजह से मजबूरन कंचनमाला को उधार मांगकर गुजारा करना पड़ा. ‘ कंचनमाला के मुताबिक उन्हें होटल के 70 हजार और खाने के 40 हजार रुपए चुकाने पड़े. उन्हें नहीं पता कि जो भुगतान उन्होंने किया वो रकम उन्हें वापस मिलेगी या नहीं.’

उन्होंने कहा कि ‘मैं एक ट्राम में यात्रा कर रही थी. ट्राम में यात्रा करने के लिए, एक पास की जरूरत थी, जो मेरे कोच की जिम्मेदारी थी, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया। कंचनमाला ने कहा कि उन पर बिना टिकट यात्रा करने के लिये जुर्माना भी लगाया गया। लेकिन जुर्माना देने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे, ऐसे में उन्हें अपनी एक दोस्त से पैसा लेने के लिये बाध्य होना पड़ा।

कंचनमाला एस 11 कैटेगिरी की तैराक हैं जो फ्री स्टाइल, बैक स्ट्रोक, ब्रेस्ट स्ट्रोक सभी तरह से तैर सकती हैं. इस साल भारत की तरफ से वर्ल्ड पैरा स्वीमिंग चैंपियनशिप में क्वालिफाई करने वाली वो अकेली महिला हैं.
अपनों से हारकर और अपमानित होकर भी देश के लिए सिल्वर जीता

विषम परिस्थितियों के बावजूद भी उन्होंने हार नहीं मानी और देश के लिए सिल्वर मेडल जीता … चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए वे अपने साथी खिलाड़ियों के साथ 3 से 9 जुलाई तक बर्लिन में थीं. लेकिन इस दौरान उनके साथ जो सलूक हुआ वो वाकई हर हिंदुस्तानी का दिल दुखाने वाला है.

भारतीय शूटर अभिनव ब्रिंदा ने ट्वीटर पर इस घटना की आलोचना करते हुए पीएम मोदी और खेल मंत्री विजय गोयल से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है. जवाब में खेल मंत्री विजय गोयल ने ट्वीट कर कहा की मंत्रालय को इस मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं.

कंचनमाला पांडे आंखों से नहीं देख सकती हैं. उस पर सरकार और अथारिटी की गलतियों का खामियाजा उन्हें उधार मांगकर चुकाना पड़ा. उम्मीद की जानी चाहिए कि मामले के कसूरवार किसी भी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे.

 


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