मेरी कहानी

मेरी कहानी : गुजरा हुआ कल कभी लौट कर नहीं आता, काश अपने पति के प्यार और कोशिशों के लिए मैं एक बार उनका शुक्रिया अदा कर पाती.

तर्कसंगत

July 18, 2017

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मुझे अचरज होता है कि लोग मुझे काम करता देख हैरान होते हैं और मुझसे पूछते हैं कि मै इस उम्र में भी क्यूं काम करती हूं ? मैं हंसते हुए खुद से कहती हूं क्यूं नहीं ! मुझे काम करके अच्छा लगता है और इससे मैं खुद के लिए कुछ खाने का भी खरीद लेती हूं. मैं सड़क पर ये पैकेट बेचते हुए दिन बिता देती हूं. मुझे सरकार से बहुत उम्मीद है कि वो मुझ जैसे गरीब और लाचार औरत की किसी प्रकार से भी मदद करे. इस काम को करने में सरकार को थोड़ा समय लग सकता है लेकिन कम से कम सरकार उम्रदराज लोगों को नौकरी भी दिला दे तो थोड़ी मदद हो जायेगी. मेरे पति के मौत के बाद से ही मैं चिप्स बेचती हूं. मुश्किल समय में सहारा देने के लिए हमारी कोई संतान भी नहीं है.

अब तो बस हर दिन कुछ पैसे ठीक से कमा लूं यही मेरे लिए एकमात्र खुशी है. कभी कभी तो लोग मुझ पर दया करके कुछ पैसे दे देते हैं और चिप्स का पैकेट भी नहीं लेते. बदलाव के इस दौर में भी लोगों के दिल में इंसानियत जिंदा है. मैं उनसे पैकेट लेने कि विनती करती हूं ताकि मैं खुद को लाचार ना समझूं. खाना ही अब मेरे लिए सबसे बड़ा सुख है. कभी कभी मैं खाना खरीदने लायक पैसा कमा लेती हूं या फिर कोई मझे बचा हुआ खाना दे देता है और ऐसे भी दिन होते हैं जब मुझे पानी पी कर ही भूख मिटानी होती है. भूख हर इंसान को समान्य रुप से लगती है, जैसे एक तंदरुस्त व्यक्ति को भूख लगती है मुझे भी भूख लगती है और खाली पेट सोना बहुत मुश्किल काम है. इन चिप्स के पैकेट से मेरा पेट नहीं भरता इसलिए बामुश्किल ही मैं इन्हें खाती हूं.

जिंदगी के बहुत ऐसे पहलु हैं जो भगवान में मेरी आस्था को बढ़ा देते हैं. मेरी ख्वाहिश है कि मैं अपनी जिंदगी की आखिरी लम्हे शांती से जियूं. मुझे बहुत आश्चर्य होता है कि आज कल के नौजवान किसी भी चीज की अहमियत नहीं समझते क्योंकि उन्हें सब कुछ बहुत आसानी से मिल जाता है.

मैं अपने पति को बहुत याद करती हूं , दिवाली में वो मेरे लिए मिठाइयां लाया करते थे और हमलोग साथ खाया करते थे. वो परिवार के लिए बहुत मेहनत करते थे. अक्सर हम लोगों कि कद्र नहीं करते और जब तक हम ये समझ पाते हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. बीता वक्त कभी मुड़कर नहीं आता, काश उनके प्यार और कोशिशों के लिए मैं एक बार उनका शुक्रिया अदा कर पाती लेकिन मुझे पता है कि वो ये बात जानते हैं कि अब मैं उनकी कितनी कद्र करती हूं. मैं हर सुबह उनसे बात करती हूं, शायद ही कोई बिल्कुल तनहा रहने की पीड़ा को समझ पाये. काश मुझे सुनने के लिए कोई मेरे पास होता.


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