ख़बरें

राजस्थान: मर रहीं हजारों गायें, सुध लेने वाला कोई नहीं

तर्कसंगत

July 31, 2017

SHARES

हमारे देश में गाय को माता का दर्जा दिया जाता है लेकिन गौवंश की देखरेख में लगातार कोताही देखने को मिलती है. ताजा मामला एशिया की सबसे बड़ी पथमेड़ा गौशाला से है जहां बाढ़ की वजह से करीब 800 गायों की जान चली गयी वहीं हजारों गायों की जिंदगी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं.

राजस्थान में बारिश और बाढ़ का कहर जालौर और सिरोही जिले पर टूटा है. जालौर में सांचौर के पास पांचला बांध टूट गया. इसके बाद बांध का पानी सैलाब बनकर 10 किलोमीटर दूर पथमेड़ा गौशाला जा पहुंचा.

स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक राजस्थान के जालौर की पथमेड़ा गौशाला को दुनिया की सबसे बड़ी गोशाला माना जाता है. जहां एक साथ 50,000 हज़ार गायें एक ही गौशाला में रहती हैं.

पिछले कुछ दिनों से राजस्थान में ज़बरदस्त बारिश जारी है. 25 जुलाई को गौशाला में पानी भर गया जिससे कई गायें डूब गईं. उस वक़्त गोशाला में गायों के बचाव के लिए कोई संसाधन नहीं था.

एक अकेली गोशाला में ही 615 गायें मर गईं. तब से अब तक गौशाला का पानी नहीं उतरा है और अब भी कई गायें फंसी हुई हैं . अलगअलग शेल्टर में सैंकड़ों गाय पानी और कीचड़ में धंसी हुई हैं.

ऐसा ही हाल पथमेड़ा गौशाला के जालौर और सिरोही में 18 शेल्टर हाउस का है. यहां 39 हजार गायें हैं. वैसे पथमेड़ा ट्रस्ट के पास पूरे राज्य मे दो लाख गाय और अलगअलग गौशालाएं हैं. यहां गौशाला प्रबंधन ने स्थानीय लोगों की मदद से सैंकड़ों गाय को रेस्क्यू भी किया है. बावजूद हजारों गाय मदद के इंतजार में हैं.

गौसेवकों की ओर से भी गायों को बचाने की कोशिशें की जा रही हैं. पानी में से गौवंश को निकालने में गौशाला के स्टाफ के अलावा लोकल लोग भी मदद कर रहे हैं.

सिरोही जिले के केसुआ गांव की नंदगांव गौशाला में भी 200 गायों की मौत हो गई है. इस गोशाला में जहां गायें रहती थीं, वहीं मिट्टी का कटाव हो गया.

पूरे इलाके में कम से कम 4,000 गायें फंसी हुई हैं. इलाके में हर तरफ पानी ही पानी नज़र आ रहा है. हाइवे, गांव, शहर सब डूब से गए हैं. जगहजगह गायों की लाशें तैरती नज़र आ रही हैं. तीन दिन बाद पहुंचा प्रशासन बड़ेबड़े गड्ढे खोद कर गायों को दफना रहा है. ताकि संक्रमण और बीमारी का ख़तरा न हो.

पथमेड़ा गौशाला के प्रवक्ता पूनम राजपुरोहित ने पत्रकारों से कहा, ‘पथमेड़ा में पानी के सैलाब और चारा नहीं मिल पाने की वजह से भी गाय दम तोड़ रही है. गायों को चारा नहीं मिल रहा है, जो बचा है वह भी बह गया. इस गौशाला मे गायों की एक दिन की खुराक एक करोड़ की है. तीन हजार गायें पानी या कीचड़ में धंसने से या भूख की वजह से संघर्ष कर रही हैं.’

हालांकि, जालौर प्रशासन ने एक बयान जारी कर बताया है कि उसने गायों को चिकित्सीय सुविधाएं पहुंचाने के लिए गोलासन और नंदगांव की बड़ी गौशालाओं में मेडिकल टीम भेजी है. 

लेकिन लगातार बारिश और पानी के सैलाब के चलते फिलहाल रेस्क्यू और सरकारी मदद का भी ज्यादा फायदा नहीं मिल रहा है. वैसे इस मामले में राज्य सरकार अभी तक चुप है.


Contributors

Edited by :

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...