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मिसालः मुसलमान और हिंदू परिवारों में होगा किडनी का आदान-प्रदान

तर्कसंगत

August 2, 2017

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मेरठ का एक निजी अस्पताल सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम करने जा रहा है. इस अस्पताल में हिंदू और मुसलमान परिवारों के बीच किडनी का आदान प्रदान होगा.

एक मुसलमान मरीज़ को एक हिंदू महिला अपनी किडनी देगी और बदले में उस महिला के पति को मुसलमान मरीज़ की पत्नी की किडनी लगेगी.

किडनी का आदान प्रदान करने जा रहे ये परिवार  अमरोहा और बरेली के हैं.

निजी चिकित्सक डॉ संदीप गर्ग ने तर्कसंगत को बताया, “दोनों परिवारों ने किडनी दान करने के लिए प्रशासनिक अनुमति लेने के लिए आवेदन दिया है और जल्द ही इसकी अनुमति मिल जाएगी.”

उन्होंने बताया कि 64 वर्षीय मरीज़ असलम उनके यहां लंबे समय से इलाज करा रहे हैं और इसी साल मार्च में उनकी किडनी फेल हो गई.

डॉ. गर्ग के मुताबिक उनकी पत्नी सायरा बेगम अपने पति को किडनी देना चाहती थीं लेकिन दोनों का ब्लड ग्रुप मेल नहीं खा रहा था.

इसी दौरान बरेली के बरेली के 54 वर्षीय लालकरण भी उनके यहां इलाज कराने आए जिन्हें किडनी की ज़रूरत थी. लालकरण की पत्नी सरोज भी अपने पति को किडनी देना चाहती थीं लेकिन उन दोनों का ब्लड ग्रुप भी मेल नहीं खा रहा था.

ऐसे में डॉक्टर गर्ग ने असलम को सरोज और लालकरण को सायरा बेगम की किडनी लगाने का सुझाव दिया जिसके लिए दोनों परिवार राज़ी हो गए हैं.

भारतीय क़ानून के मुताबिक किसी मरीज़ को सिर्फ़ सगे संबंधी ही किडनी दे सकते हैं. हालांकि किडनी स्वैप या अदला बदली करने का प्रावधान है लेकिन इसके लिए प्रशासनिक अनुमति लेनी होती है.

डॉ. गर्ग कहते हैं कि दोनों ही मरीज़ों और दानदाताओं की चिकित्सीय जांच कर ली गई है और सबकुछ सामान्य है.

उनका कहना है कि प्रशासनिक अनुमति मिलने के बाद दोनों मरीज़ों को एक-दूसरे की पत्नी की किडनी लगाई जा सकेगी.


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