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युवक के सुसाइड नोट से हिली झारखंड पुलिस, उठ रहे हैं गंभीर सवाल

Poonam

August 5, 2017

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गुरुवार को धनबाद के रहने वाले एक युवक शिव सरोज कुमार ने रांची के सेवा सदन अस्पताल के सामने आत्महत्या कर ली थी.

युवक ने अपना सुसाइड नोट भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अति विशिष्ट लोगों को ईमेल किया था और कई गंभीर सवाल खड़े किए थे.

आत्महत्या का सुसाइड नोट इंटरनेट पर वायरल होने के बाद झारखंड पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. रांची के चुटिया थाने के प्रभारी को भी पद से हटा दिया गया है.

युवक ने अपने सुसाइड नोट में चुटिया थाने के प्रभारी और रांची के एक डीएसपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए समूची पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे.

ये है युवक का सुसाइड नोट,

मेरा नाम शिव सरोज कुमार है. मेरी उम्र 27 वर्ष है. मैं धनबाद का रहनेवाला है. पासपोर्ट के कुछ काम से एयर एशिया की फ्लाइट से दिल्ली से रांची शनिवार को आया था. चुटिया स्टेशन रोड स्थित रेडियंट में ठहरा था. मुझे रूम नंबर 402 दिया गया था. रात के करीब 10 बजे होटल में कुछ लोग शराब पीकर हल्ला करने लगे. मना करने पर मुझे धमकी दी. दूसरे दिन मुझे होटल वालों ने कमरा नंबर 201 में शिफ्ट कर दिया. मैं डिनर के लिए रात करीब 10.13 बजे होटल से बाहर निकला था. मोड़ पर एक कार रुकी. मुझसे एवीएन प्लाजा का एड्रेस पूछा गया. कार के समीप पहुंचने पर मेरे मुंह पर रूमाल रख दिया गया. मैं बेहोश होने लगा. होश आया, तब खुद को कार की डिक्की में पाया. मैंने पुलिस कंट्रोल रूम में 100 नंबर को और अपने जीजाजी को फोन कर घटना की जानकारी दी.

इसके बाद कार में सवार लोगों ने मेरे हाथ से मोबाइल ले लिया. थोड़ी देर बाद मैं खुद को एक तालाब में पाया. वहां से जैसे-तैसे बाहर निकला. इसके बाद मैंने खुद को मेडिका अस्पताल में पाया. यह खबर सभी अखबारों में निकली. घटना की जानकारी मिलने के बाद मेरे पापा धनबाद से रांची पहुंचे और मेरे इलाज कराया. मेरे साथ हुई घटना को लेकर चुटिया थाने में केस दर्ज हुआ. और यहां जो मेरे साथ हुआ, उसका दर्द मैं बयान नहीं कर सकता. सोमवार को दो बजे अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद मैं चुटिया थाना पहुंचा. होटल जाने पर मैंने देखा कि मेरे कमरे का सब सामान बिखरा पड़ा है. चुटिया थाने के थाना प्रभारी अजय कुमार वर्मा केस हैंडल कर रहे हैं. उनसे जब बात हुई, तो ऐसा नहीं लगा कि एक थाना प्रभारी से बात हो रही है. वह गाली देते हुए मुझे और मेरे पापा को मारने व जेल भेजने की धमकी देने लगे. मुझसे होश में बयान लिये बिना उन्होंने केस में क्या- क्या लिख दिया, मुझे पता ही नहीं चला. उन्होंने हमारी एक न सुनी. मुझे और मेरे पापा को थाने में ही बैठाये रखे. कहा कि जब डीएसपी आयेंगे, तब सामान मिलेगा. बाद में सिटी डीएसपी थाना पहुंचे. उन्होंने भी गालियां देनी शुरू कर दी. मेरे पापा से बस इतनी गलती हुई थी कि उन्होंने पुलिस को मेरे बारे में आइटी ऑफिसर बताने के बजाय आइबी का ऑफिसर बता दिया था.

मैं अपने पिता का इकलौता बेटा हूं. डीएसपी ने मेरे पापा के सामने मुझे गालियां दी. वह मेरे पिता की कॉलर पकड़ कर धमकी देने लगे. मेरे साथ पुलिस ने आरोपी जैसा व्यवहार किया. मेरे पापा के साथ भी बहुत गलत व्यवहार किया गया. मुझे और मेरे पिताजी काे दोपहर दो बजे से लेकर दूसरे दिन सुबह सात बजे तक थाने में रखा गया. इस दौरान होटल के लोग भी आये, लेकिन वे जल्दी चले गये. हमारे साथ जानवरों के जैसा व्यवहार किया गया. मैं अब पुलिस की नजर में पीड़ित नहीं होकर आरोपी बन गया था. डीएसपी मेरे खिलाफ भी अनुसंधान करने लगे. वह मेरे मोबाइल का सीडीआर निकाल कर मेरी दीदी और मेरे रिलेटिव के साथ मेरा संबंध बताने लगे. देखते ही देखते उन्होंने पूरा केस ही पलट दिया. मुझे और मेरे पापा को अलग- अलग बुला कर परेशान किया गया. मेरे पापा मेरे सामने जलील होते रहे और मैं कुछ नहीं कर पाया. मेरे पापा 2017 में बीसीसीएल धनबाद से सेवानिवृत हुए हैं. उनके साथ जैसे व्यवहार किया गया, उसे देख मुझे समझ में आ गया कि आम लोग पुलिस से हेल्प क्यों नहीं लेते हैं. थाने में जो होता है वह मुझे अब पता चला गया. हमसे बार- बार पूछताछ की गयी, ताकि हम अपना बयान बदल दें.

इसके पहले मैं और मेरे पापा कभी पुलिस स्टेशन नहीं गये थे. मेरे साथ पुलिस स्टेशन में जो कुछ हुआ, उससे मेरा रूह कांप जाता है. अब मैं जीना नहीं चाहता हूं. मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं, क्योंकि मुझे पता है कि थाने में केस को पूरी तरह पलट दिया जायेगा. मुझे धमकी दी गयी है कि जेल भेज कर करियर बिगाड़ दिया जायेगा. मेरी पूरी फैमिली को फोन कर परेशान किया गया. जब जीना नहीं चाहता.

लेकिन सभी से कुछ सवाल है, जो पूछना चाहता हूं.

– क्या पुलिस को गाली देकर बात करने का परमिशन है
– नॉर्मल लोगों की कोई रिस्पेक्ट नहीं होती थाने में
– वे हमारे परेशानी दूर करने के लिए होते हैं या बढ़ाने के लिए
– हम गुंडे से डरते हैं, क्योंकि वे गुंडे हैं. लेकिन हम पुलिस से भी डरते हैं, क्योंकि वे वरदी में गुंडे हैं.
– सीनियर पुलिस अधिकारी जब गाली देकर बात करें, तो उनमें और रोड चलते मवाली में क्या अंतर है.
– आज चुटिया थाना प्रभारी और सिटी डीएसपी की वजह से मेरे पापा और मम्मी ने अकेला बेटा खो दिया.

क्या हम आज़ादी से जी नहीं सकते हैं. मैं अपने पापा को थाने में अकेला छोड़ आया सुसाइड करने. मुझे नहीं पता कि उनके साथ क्या किया गया होगा. कौन साथ देगा हम जैसे लोगों का. कहां गये मानवाधिकार वाले. कहां गये हमारे झारखंड के सीएम. मेरी मौत की वजह सुसाइड नहीं मर्डर है. इसकी पूरी जिम्मेवारी चुटिया थाना प्रभारी और सिटी डीएसपी का है. उन्होंने एक रात में रावण राज की याद दिला दी. ऐसा चेहरा कभी प्रशासन का नहीं देखा था. मेरी मौत की जिम्मेवारी सिर्फ और सिर्फ चुटिया थाना प्रभारी अजय कुमार वर्मा और सिटी डीएसपी पर हैं. आप सभी से निवेदन है कि मेरे पिता की सहायता करें. मुझे कुछ नहीं चाहिए. वे सब थाने में मेरे पिता के साथ बुरा कर दें.

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने पूरी घटना की जांच के आदेश दिए हैं.

रांची में युवक शिव सरोज कुमार द्वारा आत्महत्या किए जाने से बेहद दुखी हूं। डीजीपी को पूरे मामले की जांच कर 24 घंटे में रि…

Posted by Raghubar Das on Thursday, 3 August 2017

 


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