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गोरखपुर पर शाह बोले, ‘ऐसे हादसे होते रहते हैं’

तर्कसंगत

August 14, 2017

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गोरखपुर में कथित रूप से ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने के बाद दो दिनों के भीतर तीस से ज़्यादा बच्चे मर गए. जबकि पूरे सप्ताह में मौत का ये आंकड़ा 60 के पार है.

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में बच्चों की मौत के बाद से पूरे देश में गुस्सा है.

जितनी दुखद बच्चों की मौत है उससे ज़्यादा दुखद सत्ताधारी दल के नेताओं की प्रतिक्रियाएं हैं.

बैंगलुरू पहुंचे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से जब गोरखपुर में हुई मौतों पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, “इतने बड़े देश में ऐसे हादसे होते रहते हैं.”

शाह ने ये भी कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस्तीफ़ा नहीं देंगे.

बीबीसी हिंदी के मुताबिक उन्होंने कहा, “कांग्रेस का काम है इस्तीफ़ा मांगना. इतने बड़े देश में बहुत सारे हादसे हुए, पहली बार ऐसा हादसा नहीं हुआ है.”

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने ये भी कहा कि ये हादसा है और जांच करके ही ग़लती तय की जाएगी.

इससे पहले उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह अगस्त को बच्चों की मौत का महीना बता चुके हैं.

और उनके बयान से पहले यूपी सरकार अपने अधिकारी बयान में मौत की ख़बरों को ‘भ्रामक’ बता चुकी है.

अब सवाल यह उठता है कि जब सत्ताधारी दल और उसके नेता बच्चों की मौत को लेकर इस हद तक असंवेदनशील हों तो फिर किसी की ज़िम्मेदारी तय होगी, ये उम्मीद कैसे की जाए?

भारत की आज़ादी के 70 साल हो चुके हैं. हमारा देश आज दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है.

हम विश्वगुरू बनने की चाहत रखते हैं. लेकिन अब जब हम अपने बच्चों को ही नहीं बचा पा रहे हैं तो हमारी व्यवस्था पर सवाल उठने लाजिमी है.

लेकिन दिक्कत ये है कि गोरखपुर में जो हुआ है उसकी कोई भी ज़िम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है.

अब सामने आ रहीं नई जानकारियों के मुताबिक अस्पताल में ऑक्सीजन आपूर्ति करने के लिए ज़िम्मेदार पुष्पा सेल्स नाम की कंपनी ने कई बार अपने भुगतान के लिए पत्र लिखा था और यह पत्र उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी भेजा गया था.

सरकार ने कार्रवाई करते हुए मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को तो निलंबित कर दिया है.

लेकिन क्या इतनी बड़ी घटना हो जाने के बाद सरकार के किसी मंत्री का भी इस्तीफ़ा होगा? कम से कम अमित शाह के बयान के बाद तो ऐसा नहीं लगता.

यदि इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी नेता अपने पद पर बने रहते हैं तो क्या गारंटी है कि वो आगे गंभीर होंगे?


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