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बच्चों की मौत के मामले में बेहद ख़राब है गोरखपुर का रिकॉर्ड

तर्कसंगत

August 14, 2017

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शिशु मृत्युदर (आईएमआर) किसी भी देश के पिछड़ेपन का पैमाना होती है.

यदि गोरखपुर एक देश होता तो यह शिशुमृत्यु दर के मामले में दुनिया के सबसे पिछड़े देशों में से एक होता.

उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के डाटा के मुताबिक गोरखपुर ज़िले में पैदा होने वाले प्रत्येक एक हज़ार बच्चों में से 62 की मौत एक साल से कम उम्र में ही हो जाती है.

उत्तर प्रदेश में प्रत्येक हज़ार में से 48 बच्चों की मौत एक साल की उम्र से पहले हो जाती है जबकि भारत के लिए ये संख्या 40 है.

क़रीब 44.5 लाख की आबादी वाले गोरखपुर की आबादी दुनिया के कई देशों से ज़्यादा है.

यदि गोरखपुर को एक देश मान लिया जाए तो शिशु मृत्युदर के मामले में यह शीर्ष बीस देशों में शामिल होगा.

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक सीआईए फैक्टबुक की शिशु मृत्युदर की सूची में गोरखपुर पश्चिमी अफ्रीकी देश गाम्बिया के साथ 18वें नंबर पर होता.

इस सूची में भारत 49 नंबर पर है. सबसे ख़राब शिशु मृत्युदर अफ़गानिस्तान की है जहां प्रत्येक हज़ार में से 112.80 बच्चों की मौत एक साल से कम उम्र में ही हो जाती है. इसके अलावा माली और सोमालिया इस सूची में सबसे ऊपर हैं.

यही नहीं गोरखपुर में प्रत्येक एक हज़ार में से 76 बच्चों की मौत पांच साल से कम उम्र में ही हो जाती है. भारत के लिए यह आंकड़ा 50 का है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि गोरखपुर की ख़राब शिशु मृत्युदर की वजह कुपोषण, खुले में शौच और पीने के लिए साफ़ पानी उपलब्ध न होना है.

चौथे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के मुताबिक गोरखपुर में 35 प्रतिशत बच्चों का वजन कम है.

यही नहीं यहां हर तीसरे बच्चे का टीकाकरण पूरा नहीं होता है. गोरखपुर ज़िले में सिर्फ़ 35 प्रतिशत घरों में ही शौचालय हैं यानी यहां खुले में शौच करना एक बड़ी समस्या है.

यहां के 25 प्रतिशत बच्चे डायरिया की बीमारी से पीड़ित रहते हैं.

बाल रोग विशेषज्ञों का मानना है कि कुपोषण और अधूरे टीकाकरण की वजह से बच्चों में एन्सीफिलाइटिस जैसी गंभीर बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है.

गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में ऑक्सीजन की कथित कमी से 60 से अधिक बच्चों की अचानक हुई मौत की वजह से भले ही गोरखपुर आज सुर्खियों में है लेकिन यहां बच्चों की मौत की समस्या पुरानी है.

इसके लिए किसी एक व्यक्ति को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पांच बार से यहां से सांसद हैं और उनसे पहले उनके गुरु अवैद्यनाथ यहां से सांसद थे.

ऐसे में गोरखपुर में बच्चों की मौत की ज़िम्मेदारी कुछ हद तक योगी आदित्यनाथ पर ही आती है.

अब बच्चों की मौत के बाद भारत सरकार और मुख्यधारा की मीडिया का ध्यान गोरखपुर पर गया है. उम्मीद की जानी चाहिए कि बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के लिए अब यहां ठोस क़दम उठाए जाएंगे.

Source: The Times Of India, Image: BBC HINDI


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