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अपनों में ही बेगाने हुए उस्ताद बिस्मिल्लाह खां

तर्कसंगत

August 21, 2017

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बिस्मिल्लाह खां की बरसी पर उनके चाहने वाले उन्हें याद कर रहे हैं लेकिन उनके शहर में उनके परिवार में ही उनकी विरासत खतरे में है. उस्ताद के बेटे ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा है कि अगर सरकार ने उनकी सुध नहीं ली, तो वो देश छोड़ देंगे.

21 अगस्त साल 2006 में बनारस के घाटों से वो धुनें हमेशा-हमेशा के लिए शांत हो गईं जो उस शहनाई से निकला करती थीं….जिसे अपनी सांसे दिया करते थे उस्ताद बिस्मिल्लाह खां.

लेकिन उनकी विरासत आज भी उनके घर में संजो कर रखी गई है. भले ही उनका परिवार आज कई तरह की मुसीबतों का सामना कर रहा हो लेकिन उनकी यादें, उनकी शहनाई और उनके पुरुस्कार आज भी इस घर में दुनियाभर के लिए इतिहास के तौर पर रखे गए हैं. दुख की बात है कि उनकी विरासत की सुध लेने वाला कोई नहीं है.

आलम ये है की उनके पैतृक निवास की हालत अब खस्ता हो चुकी है. घर में रखे हुए उनके पुरुस्कारों में अब दीमक देखने को मिल रही है. इसे संभालने वाला बिस्मिल्लाह का परिवार बेहद दयनीय हालत में जीने को मजबूर है.

जो घर कभी शहनाई के शहंशाह से गुलजार रहता था आज वहां बेबसी नजर आती है. उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के छोटे बेटे का आरोप है कि कोई भी आज उनके पिता की विरासत को बचाने वाला और उनके परिवार को संभालने वाला सामने नहीं आया है. लेकिन उनके पिता बिस्मिल्लाह खां के नाम का फायदा उठाने वाले बहुत लोग हैं.

सिर्फ नाजिम ही नहीं बल्कि बिस्मिलाह खान के पोते नासिर अब्बास भी अपने परिवार का आर्थिक स्थिती को लेकर अपना दर्द बयां कर रहे हैं. बिस्मिल्लाह खां के पोते नासिर अब्बास भी शहनाई बजाते है. लेकिन इतने बड़े दिग्गज के पोते होने के बावजूद सरकार उनकी मदद को आजतक आगे नहीं आई है.
जिस वजह से बिस्मिल्लाह खां का ना सिर्फ परिवार बल्कि उनकी विरासत भी मिट्टी में मिलती जा रही है.


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