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शर्मनाकः 6 साल की बच्ची को मलमूत्र उठाने के लिए मजबूर किया गया

तर्कसंगत

August 22, 2017

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मध्य प्रदेश में एक छह साल की बच्ची को अपना मल अपने नंगे हाथों से उठाने के लिए मजबूर किया गया.

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक ये घटना छतरपुर ज़िले की लवकुशनगर तहसील के गुधौरा गांव की है.

छह साल की बच्ची शिक्षक से अनुमति लेने के बाद मलमूत्र त्यागने गई थी.

हालांकि लड़की ने खुले में ही शौच कर लिया और पप्पू सिंह नाम के एक व्यक्ति ने उसे ऐसा करते हुए देख लिया.

पप्पू सिंह ने लड़की को अपने हाथों से ही मलमूत्र को साफ़ करने के लिए मजबूर किया.

स्थानीय पुलिस ने तर्कसंगत को बताया, “लड़की ने अपने परिवार को घटना के बारे में बताया तो उसके पिता शिकायत लेकर थाने आए. उनके साथ दलित समुदाय के अन्य लोग भी थे.”

पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 374 (मजबूर श्रम या अवैध अनिवार्य श्रम) के तहत मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस ने आईपीसी की धारा 504 और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम की संबंधित धाराएं भी लगाई हैं.

पुलिस का कहना है कि पप्पू सिंह फरार हैं और उन्हें पकड़ने की कोशिश की जा रही है.

पीड़िता दलित समुदाय से है जबकि अभियुक्त ठाकुर है. हालांकि अभी ये स्पष्ट नहीं है कि ये घटना जाति से प्रेरित है या नहीं.

इसमें कोई शक़ नहीं है कि खुले में शौच नहीं किया जाना चाहिए लेकिन भारत की एक सच्चाई ये भी है कि अभी शौचालयों की समूचे देश में उचित व्यवस्था नहीं है.

सरकार के स्वच्छ भारत के आंकड़ों के मुताबिक छतरपुर में अभी सिर्फ़ 5.02 प्रतिशत इलाक़ा ही खुले में शौच से मुक्त है.

जब हालात इतने ख़राब हों तो खुले में शौच को कैसे रोका जा सकता है? क्या जिन लोगों के पास शौचायल नहीं हैं उन्हें शर्मिंदा किया जाए या उन्हें अपना मलमूत्र स्वयं साफ़ करने के लिए मजबूर किया जाए या फिर अधिक शौचालय बनाए जाएं?
Courtesy: Times of India | Image Credit: Hindustan Times 


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