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बाप के पास नहीं थे 50 रुपए हो गई बेटे की मौत, मंत्री का शर्मनाक बयान

तर्कसंगत

August 22, 2017

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झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल में सिर्फ़ पचास रुपए न होने की वजह से एक बच्चे का चिकित्सीय परीक्षण नहीं हो सका जिसकी वजह से उसे समय पर इलाज़ नहीं मिला और उसकी मौत हो गई.

राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस (रिम्स) के लैब स्टाफ़ ने श्याम नाम के एक बच्चे के टेस्ट करने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि उसके पिता के पास पचास रुपए नहीं थे.

दरअसल सीटी स्कैन की फ़ीस 1350 रुपए है जबकि श्याम के पिता संतोष कुमार के पास सिर्फ़ तेरह सौ रुपए थे.

संतोष कुमार ने लैब असिस्टेंट से काफ़ी अनुरोध किया लेकिन वो टेस्ट करने के लिए नहीं माने और अंततः श्याम का टेस्ट नहीं हो सका और इलाज के अभाव में श्याम की मौत हो गई.

झारखंड पुलिस के मुताबिक बच्चे के सिर में चोट लगने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

इस घटना के बाद ये सवाल उठता है कि क्या ग़रीब की ज़िंदगी पचास रुपए से भी सस्ती है?

लेकिन इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री ने जो बयान दिया उससे सवाल उठता है कि क्या भारतीय नेताओं में संवेदनशीलता बची रह गई है?

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी से जब पत्रकारों ने श्याम की मौत पर सवाल किया तो उन्होंने बेहद अंसेवदनशील बयान देते हुए कहा, “जिसने ये ख़बर छापी है उसे ही दस-दस रुपए चंदा करके उसकी मदद कर देनी चाहिए थी.”

अब स्वास्थ्य मंत्री से कौन पूछे कि पत्रकारों का काम चंदा देने का नहीं होता लेकिन सरकार का काम हर व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का ज़रूर होता है.

भारत में एक के बाद एक लापरवाही की घटनाओं के बाद मंत्रियों के असंवेदनशील बयान आ रहे हैं.

इससे पहले गोरखपुर के अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा था कि अगस्त में तो बच्चे मरते ही हैं.

तो क्या अब ये मान लिया जाए कि भारत में आम लोगों की ज़िंदगी बेहद सस्ती है और उससे भी सस्ते हैं हमारे नेताओं के बयान.

Pic credit: NDTV

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