ख़बरें

निजता मौलिक अधिकार, क्या हैं इसके मायने?

तर्कसंगत

August 24, 2017

SHARES

भारत के सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय बैंच ने गुरुवार को सर्वसम्मति से दिए ऐतिहासिक फ़ैसले में निजता को नागरिकों का मौलिक अधिकार माना है.

सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फ़ैसले के बाद सरकार के सभी क़ानूनों को निजता की कसौटी पर भी परखा जाएगा.

अदालत ने ये भी कहा है कि कोई भी मौलिक अधिकार संपूर्ण नहीं होता है इसलिए निजता का अधिकार भी संपूर्ण नहीं हो सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निजता के अधिकार पर तर्कपूर्ण रोक का आधार भी दिया है. इसका अर्थ ये है कि सरकार के हर क़ानून को अब इस कसौटी पर भी परखा जाएगा कि उसमा तर्कपूर्ण रोक का प्रावधान है या नहीं. यानी क़ानून तर्कपूर्ण रोक के दायरे में है या नहीं.

निजता पर सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले के बाद आधार कार्ड के तहत दी जाने वाली सूचनाओं पर भी असर पड़ सकता है. हालांकि आधार और निजता के मामले पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की एक बैंच अलग से फ़ैसला लेगी. बैंच ये तय करेगी कि आधार के तहत ली जाने वाली जानकारियां कहीं नागकितों ते निजता के अधिकार का हनन तो नहीं है.

अब सरकार को ये साबित भी करना पड़ेगा कि उसके द्वारा इकट्ठा की जा रहीं नागरिकों की जानकारियां तर्कपूर्ण रोक के दायरे में हैं. निजता का अधिकार अभी तक मौलिक न होने की वजह से सरकार के पास इस मामले में असिमित अधिकार थे.

इस फ़ैसले का सबसे बड़ा असर ये होगा कि अब नागरिकों की अनुमति के बिना उनकी निजी जानकारियां सार्वजनिक नहीं की जा सकेंगी और इसका उल्लंघन होने पर नागरिक अदालत जा सकेंगे.


Contributors

Edited by :

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...