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आसाराम के खिलाफ बलात्कार मामले की धीमी सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, गुजरात सरकार से मांगा जवाब

तर्कसंगत

August 28, 2017

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सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम बापू के खिलाफ गुजरात में दर्ज बलात्कार मामले की धीमी सुनवाई के लिए गुजरात सरकार को फटकार लगाई है.

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार आसाराम बापू की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एनवी रमन्ना और जस्टिस अमिताव रॉय ने राज्य सरकार से पूछा कि अभी तक पीड़ित का बयान क्यों नहीं दर्ज हो पाया है.

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से इस पर हलफनामा मांगा है. इसके साथ अदालत ने आसाराम बापू को मामले की धीमी सुनवाई के आधार पर जमानत देने से इनकार कर दिया.

अदालत ने इस मामले की सुनवाई दीवाली तक स्थगित कर दी है.

आसाराम बापू के खिलाफ गुजरात और राजस्थान में बलात्कार के अलग-अलग मामले चल रहे हैं. गुजरात में सूरत की दो बहनों ने आसाराम और उनके बेटे नारायण साई के खिलाफ यौन शोषण और बंधक बनाने का मामला दर्ज कराया था.

इसमें बड़ी बहन ने आसाराम बापू पर अहमदाबाद के आश्रम में 2001 से 2006 के बीच यौन शोषण करने का आरोप लगाया था.

वहीं राजस्थान के मामले में एक नाबालिग लड़की ने आसाराम पर जोधपुर के एक आश्रम में यौन शोषण का आरोप लगाया था. जोधपुर पुलिस ने 31 अगस्त 2013 को आसाराम बापू को गिरफ्तार किया था, तब से वे जेल में बंद हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने 12 अप्रैल को गुजरात की निचली अदालत को आसाराम के खिलाफ यौन शोषण के मामले की तय समय में सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया था.

इससे पहले शीर्ष अदालत ने खराब स्वास्थ्य सहित अन्य बातों के आधार पर आसाराम बापू को जमानत देने से इनकार कर दिया था.


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