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गोरखपुर ही नहीं झारखंड में भी मर रहे हैं बच्चे, कुपोषण बड़ी वजह

तर्कसंगत

August 31, 2017

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पहले गोरखपुर और अब झारखंड में बच्चों की मौत की खबर ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है. जहां गोरखपुर में सिर्फ अगस्त के महीने में 290 बच्चों की मौत हो चुकी है वहीं झारखंड के दो बड़े अस्पतालों में इस महीने 146 बच्चों की मौत हो गई है.

इसी महीने में झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में 103 और जमशेदपुर के एमजीएम में 41 बच्चों की मौत हो गई. दोनों अस्पतालों के प्रबंधन ने इन मौतों की पुष्टि की है.

रिम्स अस्पताल में इस साल पिछले आठ माह में 709 बच्चों की मौत हो गयी. वहीं एमजीएम में पिछले चार महीने (मईअगस्त) में 164 बच्चे और धनबाद स्थित पीएमसीएच में जनवरी से अगस्त के बीच कुल 166 बच्चों की मौत हुई है.

बच्चों की मौत का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री रघुवर दास ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी को इसकी जांच करने का निर्देश दिया है.

वहीं रिम्स के अधीक्षक डा एसके चौधरी को उनके पद से हटा दिया गया है.

कुपोषण से मौत

रिम्स के अस्पताल प्रबंधन ने इस साल 660 बच्चों की मौत की पुष्टी की है और मौत की मुख्य वजह बर्थ एस्फेक्सिया, प्री मैच्योर डिलिवरी, सेप्सिस बताया है.

डाक्टरों ने इन मौतों के लिए कुपोषण को बड़ी वजह बताया है. डॉक्टर का कहना है की अगर बच्चा 500 ग्राम के वजन का पैदा हो तो उसे बचाना मुश्किल होता है. ऐसे बच्चे साधारणतया 24 से 48 घंटे ही जिंदा रह पाते हैं.

इस मामले पर जमशेदपुर के ज़िला जज ने एमजीएम अस्पताल का दौरा कर प्रबंधन से इस संबंध में एक अलग रिपोर्ट मांगी है. जबकि बच्चों की मौत को लेकर NHRC ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर रखा है जिसकी जांच अभी पूरी नहीं हुई है.

जिम्मेदारी किसकी?

इन सबके बीच सवाल ये उठता है कि आखिर कुपोषण या इंसेफलाइटिस जैसी बिमारी से इतनी मौत हो रही है तो सरकार की क्या जवाबदेही बनती है.

अगर एक गरीब व्यक्ति के घर कुपोषित बच्चा पैदा हो रहा है तो कुपोषण दूर करने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाये हैं.

इंसेफलाइटिस जैसी बिमारी ने अगर पांव फैलाया तो सरकार ने अनपढ़ या गरीब लोगों कि कितना जागरुक किया.

बेशक सबके जहन में कुछ सवाल होंगे जिनका जवाब सरकार को पूरी जिम्मेदारी से देना चाहिए और कम से कम मानवता के आधार पर तो जिम्मेदारी का निर्वाहन तो करना ही चाहिए.


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