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नीट के विरोध का चेहरा बनी दलित गरीब टॉपर छात्रा ने की आत्महत्या

Poonam

September 1, 2017

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17 साल की अनीता ने बारहवीं की परीक्षा में 1200 में से 1176 अंक हासिल किए थे.

यदि तमिलनाडु में मेडिकल प्राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानि नीट (नेशनल एलिज़िबिलीटी कम एंट्रेस टेस्ट) के जरिए नहीं हुई तो मेडिकल कॉलेज में उनकी सीट पक्की थी.

वो तिलनाडु के अरियालूर ज़िले के कुज़ूमूर गांव में एक दलित मज़दूर की बेटी थीं. वो अपने क्षेत्र की पहली दलित डॉक्टर भी होतीं.

नीट प्रवेश परीक्षा के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट जाने वाली अनीता ने शुक्रवार को अपने घर पर आत्महत्या कर ली.

तमिलनाडु में दशकों से बारहवीं की मेरिट के आधार पर मेडिकल में प्रवेश मिलता रहा था और अपने नंबरों के दम पर अनीता निश्चित रूप से सीट पा लेंती.

लेकिन इस साल तमिलनाडु में नीट के ज़रिए मेडिकल के दाख़िले हुए. अनीता 720 अंकों की परीक्षा में सिर्फ़ 86 अंक ही पा सकीं थी.

पिछले महीने जब वो नीट के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए दिल्ली गईं थी तो उन्होंने कहा था कि मैं डॉक्टर बनना चाहती हूं और बाहरवीं के अंकों के आधार पर मेरी सीट पक्की होती.

अनीता के रास्ते में आ गई गरीबी

बेहद गरीब दलित परिवार से आने वाली अनीता की मां की मौत बचपन में ही हो गई थी. उनके पिता टी शनमुगम तिरूची की गांधी मार्केट में सामान ढोते हैं.  नीट की तैयारी के लिए अनीता को कोचिंग भेजना शनमुगम के सामर्थ्य के बाहर था.

जिस समय अनीता ने अपने घर के अंदर साड़ी का फंदा लगाकर फांसी लगाई उनके पिता और दादी घर से बाहर थे.

तमिलनाडु में पिछले साल तक मेडिकल में प्रवेश बारहवीं के नंबरों के आधार पर होते रहे थे. पिछले साल केंद्रीय सरकार ने नीट लागू किया था लेकिन तमिलनाडु को इससे अलग रखा गया था.

इस साल भी प्रदेश की सरकार ने नीट से छूट मांगी थी और  पहले से चले आ रहे तरीके से मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश जारी रखने के लिए विधानसभा में विधेयक भी पारित किया गया था.

केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा था कि केंद्र सरकार राज्य सरकार का समर्थन करेगी लेकिन सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने अपना पक्ष बदल लिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने २२ अगस्त को तमिलनाडु सरकार को नीट के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया था.

क्या है नीट प्रवेश परीक्षा

देश भर के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में एडमिशन के लिए नीट प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है. इसका आयोजन सीबीएसई करता है. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (जेआईपीएमईआर, पांडुचेरीको इस प्रवेश परीक्षा से छूट प्राप्त है और ये संस्थान अपनी परीक्षा अलग से लेते हैं. पहले देश भर के मेडिकल कॉलेजों में दाखिलों के लिए अलग अलग प्रवेश परीक्षाएं होती थी लेकिन अब सरकार ने सभी कॉलेजों के लिए एक ही परीक्षा कराने का फ़ैसला लिया है.

क्या कोचिंग ज़रूरी है?

मेडिकल प्रवेस परीक्षाओं में शामिल होने वाले अधिकतर उम्मीदवार कोचिंग संस्थानों में कोचिंग लेते हैं. लेकिन ये कोचिंग काफ़ी महंगी होती हैं और समाज के गरीब वर्ग की पहुंच से दूर होती हैं. ऐसे में ये कहा जा सकता है कि नीट जैसी प्रवेश परीक्षाएं गरीब पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए चुनौतीपूर्ण हैं.

बारहवीं में गणित और फिजिक्स में अनीता ने सौ प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे जबकि कैमिस्ट्री में उन्होंने 200 में से 199 और बॉयोलाजी में 194 अंक प्राप्त किए थे. तमिलनाडु बोर्ड में इतने अच्छे नंबर पाने वाली अनीता नीट में 720 में से सिर्फ़ 86 अंक ही पा सकी और उसका डॉक्टर बनने का सपना टूट गया.

Source: The Hindu


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