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बछड़े की मौत, महिला को किया भीख मांगने पर मजबूर

Poonam

September 5, 2017

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मध्य प्रदेश के भिंड ज़िले में एक महिला को भीख मांगने के लिए मजबूर किया गया और एक सप्ताह के लिए उसका सामाजिक वहिष्कार कर दिया गया.

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 55 वर्षीय महिला की गलती की वजह से एक बछड़े के मौत हो गई थी. महिला को उसके ‘पाप’ की सज़ा देने के लिय भीख मांगने पर मजबूर किया गया.

भीख में मिले पैसे से महिला गंगा स्नान के लिए जाएगी.

मातादीन गांव की कमलेश बछड़े की रस्सी खींचकर उसे उसकी मां से दूर करने की कोशिश कर रहीं थी.

रस्सी तंग हो गई और बछड़े की दम घुटने से मौत हो गई.

स्थानीय पंचायत ने महिला को बछड़े की मौत का दोषी मानते हुए आसपास के गांवों में सात दिनों तक भीख मांगने की सज़ा सुना दी.

महिला को इस दौरान अपने गांव में नहीं घुसने दिया गया और कहा गया कि यदि वो गांव आती है तो उसे आजीवन बहिष्कृत रहना पड़ेगा.

गांव में किसी भी व्यक्ति ने पंचायत के डर से महिला के समर्थन में आवाज़ नहीं उठायी.

महिला हो गई बीमार, अस्पताल में भर्ती

कमलेश के बेटे अनिल श्रीनिवास ने स्थानीय मीडिया को बताया है कि उनकी मां पास के एक गांव में रिश्तेदार के घर रह रहकर भीख मांग रहीं थीं.

गांव गांव जाकर भीख मांगने की वजह से कमलेश बीमार हो गईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. उन्हें चार सितंबर को अस्पताल से छुट्टी दी गई.

वहीं पंचायत प्रमुख का कहना है कि कमलेश को किसी ने भी भीख मांगने के लिए मजबूर नहीं किया था और वो स्वयं अपने पापों की माफी के लिए ये काम कर रहीं थीं.

स्थानीय पुलिस का कहना है कि इस मामले में उसे कोई शिकायत नहीं मिली है और यदि शिकायत मिलेगी तो कार्रवाई की जाएगी.

पहला या अकेला मामला नहीं है ये

हालांकि ये अपने आप में अलग या अकेला मामला नहीं है. जुलाई में टीकमगढ़ ज़िले के एक व्यक्ति को गाय मारने के आरोप में गंगा में डुबकी लगाने की सज़ा सुनाई गई थी. इस बुजुर्ग ने अपने खेत में चर रही गाय की हत्या कर दी थी.

पापों की माफ़ी के लिए उन्हें पूरे गांव को भोज भी देने के लिए कहा गया था.

मध्य प्रदेश के ही गुना ज़िले में एक पांच साल की बच्ची की एक आठ साल के बच्चे से शादी का आदेश पंचायत ने सुना दिया था.

बच्ची के पिता ने एक बछड़े को पत्थर मार दिया था जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई थी.

भारत के कई राज्यों में गाय की हत्या करना अपराध है और इसके लिए पांच, सात और चौदर वर्षों तक की क़ैद का प्रावधान है.

हालांकि भारतीय क़ानून के मुताबिक यदि किसी ग़लती से किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उसके लिए सिर्फ़ दो साल की ही सज़ा है.

भारत के कई राज्यों में गाय को लोगों से ऊपर दर्जा दिया जाता है. ये न सिर्फ़ हमारी सामाजिक और धार्मिक बल्कि राजनीतिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है.

हम ऐसी घटनाओं की आलोचना के अलावा और क्या कर सकते हैं?

Source: NDTV


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