मेरी कहानी

मैं भीख नहीं मांगती, किताबें बेचती हूं, एक दिन मेरी बेटी इन्हीं किताबों को पढ़ेगी

तर्कसंगत

September 14, 2017

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शिक्षा वो सबसे ज़रूरी चीज़ है जो किसी व्यक्ति के पास होनी चाहिए. मैं अभागी थी कि मुझे बचपन में औपचारिक शिक्षा नहीं मिल सकी. हां, मैं समाज के पिछड़े तबके से हूं.

हालांकि आर्थिक रूप से मैंने बहुत तरक्की नहीं की है लेकिन बावजूद इसके मैं नहीं चाहती कि मेरी बेटी भी ऐसी ही मुश्किल भरी ज़िंदगी जिए. मैं चाहती हूं कि वो बहुत पढ़े और मेरे जैसे लाखों गरीब लोगों के लिए उम्मीद की रोशनी बनें.

मेरा नाम लक्ष्मी है. मेरा नाम और मेरी हालत दोनों एक दूसरे के उलट हैं. लेकिन जब मेरे सामने ये सवाल खड़ा हुआ कि मैं अपनी बेटी को कैसे पालूं तो मैंने इज्ज़त का काम चुनना पसंद किया. मैंने सड़कों पर मांगने के बजाए ख़ुद कुछ करने की सोची. हां, मैं सड़क किनारे किताबें बेचती हूं और एक दिन यहीं किताबें मेरी बेटी को ज्ञान देंगी.

मेरी बेटी अभी चार साल की है और वो जल्द ही स्कूल जाने लगेगी. उसे अपने साथ के बच्चों के साथ खेलना अच्छा लगता है लेकिन जब मैं काम करने आती हूं तो उसे साथ ले आती हूं क्योंकि उसकी देखभाल करने के लिए कोई नहीं है.

हम रोज़ मुश्किलों का सामना करते हैं. हमारे लिए हर दिन संघर्ष है. चाहे धूप हो या बारिश या बीमारी, मुझे किताबें बेचनी ही हैं. क्योंकि कोई भी ऐसी चीज़ नहीं है जो मुझे अपनी बेटी के लिए अपने सपने पूरा करने से रोक सके.

मैं जो किताबें बेच रही हूं वो न सिर्फ़ दूसरों का ज्ञान बढ़ाएंगी बल्कि मेरा अपनी बेटी को पढ़ाने का सपना भी पूरा करेंगी.

मैं सभी लोगों से अपील करती हूं कि कम से कम अपने बच्चों को बुनियादी तालीम तो ज़रूर दें. ग़रीबी और पिछड़ेपन से निकलने का रास्ता सिर्फ़ शिक्षा ही है.

Story By – Pramod G Kamath | Humans of Mangalore


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