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रोहिंग्या संकटः बांग्लादेश-म्यांमार सीमा पर गुरू का लंगर, रोज़ाना 35 हज़ार को खाना

तर्कसंगत

September 14, 2017

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सिख समुदाय के अंतरराष्ट्रीय राहत संगठन खालसा एड से जुड़े स्वयंसेवकों ने बांग्लादेशम्यांमार सीमा पर आए रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए लंगर शुरू कर दिया है.

म्यांमार के रखाइन प्रांत में जारी हिंसा के कारण तीन लाख से अधिक रोहिंग्या बांग्लादेश पहुंचे हैं जहां वो शरणार्थी कैंपों में रह रहे हैं.

खालसा एड संस्था को बांग्लादेश सरकार ने म्यांमार सीमा पर गुरू का लंगर शुरू करने की अनुमति दे दी है.

गुरू के लंगर में लोगों के लिए ताज़ा गर्म खाना बनाया जाता है.

Rohingya Muslim Refugees : After Finding a Safe & a Clean place ; Our team has started cooking for feeding 1000's of…

Nai-post ni Khalsa Aid International noong Miyerkules, Setyembre 13, 2017

खालसा एड ने अपने फ़ेसबुक पर किए गए एक पोस्ट में बताया है कि उसे सरकार ने शरणार्थियों के लिए ताजा खाना बनाने की अनुमति दे दी है.

शुरुआत में खालसा एड का दल पैक खाद्य पदार्थों को ही शरणार्थियों में बांट रहा था.

गुरुवार को शाहपुरी द्वीप के एक स्थान पर खालसा एड ने लंगर सेवा शुरू की है. यहां नावों के ज़रिए रोहिंग्या शरणार्थी पहुंच रहे हैं.

शुरुआत में खालसा एड ने प्रतिदिन 35 हज़ार लोगों के हिसाब से खाना तैयार करने का लक्ष्य तय किया है लेकिन ये संख्या बढ़ भी सकती है.

Donate in Indian Rupees. This is only for the residents of India.For donations from outside India please use the following link: https://www.khalsaaid.org/donate

Nai-post ni Khalsa Aid International noong Miyerkules, Setyembre 13, 2017

म्यांमार से बचकर भाग रहे रोहिंग्या लोगों में ज़्यादातर बच्चे हैं जिन्होंने कई दिनों से खाना नहीं खाया है.

खालसा एड का कहना है कि यहां पहुंच रहे लोग बेहद ज़रूरतमंद हैं और उनके पास कुछ भी नहीं हैं.

लंगर के पहले दिन लोगों को चावल और सब्ज़ी परोसी गई. खालसा एड का कहना है कि स्थानीय लोगों ने भी उनकी लंगर शुरू करने में मदद की है.

खालसा एड का ये लंगर कितने दिन चलेगा ये इस बात पर भी निर्भर है कि वो लोगों से कितना पैसा जुटा पाते हैं.

खालसा एड जैसे संगठनों का काम आम लोगों से मिली दान की राशि पर ही चलता है. रोहिंग्या लोगों की मदद के लिए खालसा एड के स्वयंसेवक लोगों से मदद की गुहार कर रहे हैं और पैसा जुटा रहे हैं.


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