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मुंबई हमले में घायल मरीन कमांडो ने जीती मैराथन

Poonam

September 15, 2017

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मुंबई में 2008 में हुए आंतकी हमले सिर्फ़ मुंबई ही नहीं बल्कि भारत की आत्मा पर एक ज़ख़्म हैं.

इन हमलों में न सिर्फ भारत के आम नागरिकों ने जान गंवाई थी बल्कि कई बहादुर जवानों को भी सर्वोच्च बलिदान देना पड़ा था.

इन्हीं हमलों में आतंकियों से लोहा ले रहे प्रवीण तेवतिया का बदन तो गोलिया से ज़ख़्मी हो गया लेकिन उनका हौसला बरक़रार रहा.

शौर्य चक्र विजेता और पूर्व मरीन कमांडो तेवतिया ने अब 72 किलोमीटर की मैराथन दौड़ में पदक जीतकर सबको चौंका दिया है.

तेवतिया ने नौ सितंबर को लद्दाख के खारदुंग ला मैराथन में हिस्सा लिया था. प्रवीण ने निर्धारित समय में इस मैराथन को पूरा कर पदक हासिल किया है.

गोली लगने के बाद प्रवीण आंशिक तौर पर बहरे भी हो गए थे. इसके बाद भारतीय नौसेना ने उन्हें नॉनएक्टिव ड्यूटी दे दी थी. तेवतिया स्वंय को नौसेना के लिए फिट साबित करने के लिए ही मैराथन की तैयारी कर रहे थे.

प्रवीण तेवतिया ने नवभारत टाइम्स को बताया, “जब मुझे गोली लगी तो मेरे बचने की उम्मीद नहीं थी लेकिन मैंने पांच महीने संघर्ष किया और ठीक हुआ. हालांकि मेरी सुनने की क्षमता ज़रूर प्रभावित हुई.”

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर ज़िले के भतोला गांव के रहने वाले प्रवीण तेवतिया ने अपने हौसले को न सिर्फ़ जिया बल्कि उसे साबित भी किया है.

तेवितया जानते थे कि वो फिर से मरीन कमांडो नहीं बन सकते लेकिन वो कुर्सी पर बैठकर भी नौकरी नहीं करना चाहते थे.

उन्होंने नेवी पर्वतीय दल के लिए आवेदन दिया जिसे मेडिकल आधार पर खारिज कर दिया गया. इसके बाद तेवतिया ने ख़ुद को फिट साबित करने का फ़ैसला किया.

प्रवीण ने साल 2014 में मैराथन की तैयारी शुरू की. मैराथन धावक प्रवीण बाडीवाला ने उनकी तैयारी में मदद की.

तेवतिया ने मुंबई मैराथन में अलग नाम से हिस्सा लिया क्योंकि वो असफल होने पर नकारात्मक प्रतिक्रिया को लेकर चिंतित थे.

साल 2016 में उन्होंने इंडियन नेवी हॉफ़ मैराथन में हिस्सा लिया. प्रवीण ने इसी साल मार्च में जयपुर में 1.9 किलोमीटर तैराकी, 90 किलोमीटर साइक्लिंग और 21 किलोमीटर दौड़ में हिस्सा लिया.

लेकिन नेवी ने इसके बाद भी उनकी फिटनेस को स्वीकार नहीं किया. मैराथन की तैयारी करने के लिए 31 जुलाई को तेवतिया ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली. प्रवीण ने शनिवार को 18380 फीट की ऊंचाई पर 12.5 घंटे में मैराथन पूरी की और पदक पक्का कर लिया.


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