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चिंताजनकः तीन साल में सड़क के गड्ढों ने ली दस हज़ार की जान

तर्कसंगत

September 22, 2017

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भारत में सड़कों के गड्ढे सबसे बड़े क़ातिल साबित हो रहे हैं. सड़कों के गड्ढों की वजह से लोगों की मौत की कहानी सिर्फ़ चिंताजनक ही नहीं बल्कि दुखद भी है.

सड़कों के गड्ढे हास्य, चुटकुलों, कार्टूनो, गीतों और वीडियो का हिस्सा बनते रहे हैं. लेकिन अबे ये सिर्फ़ हंसने भर की बात नहीं रह गई है क्योंकि इनकी वजह से बड़ी तादाद में लोग मारे जा रहे हैं या अपंग हो रहे हैं.

इन गड्ढों की सबसे बड़ी वजह सार्वजनिक सेवाएं देने वाली एजेंसियों की लापरवाही ही है.

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक गड्ढों की वजह से बीते चार साल में भारत में 11386 लोगों की जान जा चुकी है. यानी प्रतिदिन लगभग सात लोगों की जान सड़क के गड्ढों की वजह से जा रही है.

सड़क एवं परिवहन मंत्रालय की ओर से जारी डाटा के मुताबिक सबसे ज़्यादा 3428 मौतें उत्तर प्रदेश में हुई हैं. इसके बाद महाराष्ट्र का नंबर है जहां 1410 लोग मारे गए. मध्य प्रदेश में 1244, पश्चिम बंगाल में 783, बिहार में 659 ,  गुजरात में 597, आंध्र प्रदेश में 497,  तमिल नाडु में 481 , और पंजाब में  361 लोग गड्डों की वजह से मारे गए.

वास्तव में मारे गए लोगों की संख्या कहीं ज़्यादा हो सकती है क्योंकि सभी हादसों को रिकार्ड में दर्ज नहीं किया जाता है और मंत्रालय के पास दुर्घटनाओं को लेकर विश्वस्नीय डाटा भी नहीं है.

साल 2003 में कुल 2607 लोगों की मौत गड्ढों की वजह से हुई थी जबकि 2014 में 3039 और 2015  में 3416 लोग गड्ढों की वजह से मारे गए. साल 2016 में ये संख्या 2324 रही.

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने द टाइम्स ऑफ़ इंडिया से कहा कि कई राज्यों में मरने वालों की तादाद इस वजह से ज़्यादा है क्योंकि वहां सड़कों की लंबाई और वाहनों की संख्या ज़्यादा है और बारिश भी ज़्यादा होती है.

महाराष्ट्र उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, असम और पश्चिम बंगाल भारत की कुल लंबाई का 43 प्रतिशत हैं.

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज़्यादा मौतें महाराष्ट्र में हुई हैं. ग्रामीण इलाक़ों की सड़कों पर हादसे ज़्यादा होते हैं क्योंकि शहरी इलाक़ों के मुकाबले इनकी गुणवत्ता खराब होती है.

वहीं दिल्ली में ओवरलोडे ट्रक सड़कों और फुटपाथ को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं.

विशेषज्ञों के मुताबिक हर साल सड़क हादसों में 8 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है. विशेषज्ञ इसके लिए सड़कों की डिज़ाइन और ख़राब रखरखाव को ज़िम्मेदार मानते हैं.

वहीं सड़क इंजीनियरों का मानना है कि गड्ढों की वजह शहरों की ख़राब जल निकासी व्यवस्था है.

मानसून के दौरान तो देशभर में सड़कों की हालत पानी भरने की वजह से ख़राब हो जाती है. सड़कों से जब बारिश का पानी हटता है तो अपने पीछे गड्ढे छोड़ जाता है.

सड़क हादसों के मामले देखने वाले अधिवक्ता वीएस सुरेश कहते हैं कि यदि किसी व्यक्ति की जान सड़क में गड्ढा होने की वजह से जाती है तो सरकारी एजेंसियां उसे हर्जाना देने के लिए बाध्या होती हैं.

विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि भारत में सड़कों पर स्पीड ब्रेकर को लेकर भी कोई एक मानक डिज़ाइन नहीं है.

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ रोहित बालुजा कहते हैं कि जब तक सड़कों में गड्ढों के लिए सड़क बनाने वाली एजेंसियों को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा तब तक गड्ढों की समस्या ख़त्म नहीं हो सकती है.


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