ख़बरें

30 साल तक देशसेवा फिर भी नागरिकता पर सवाल ?

तर्कसंगत

October 1, 2017

SHARES

मोहम्मद अजमल हक एक ऐसा नाम जिसने भारतीय फौज में 30 साल रहकर वतन की रक्षा की लेकिन रिटायरमेंट के बाद मोहम्मद अजमल हक से उनकी नागरिकता साबित करने को कहा गया है.

अजमल हक कहना है कि उन्हें असम पुलिस का एक नोटिस मिला है जिसमें उन्हें संदिग्ध वोटर श्रेणी में रखा गया है और ट्राइब्यूनल के सामने पेश होने के लिए कहा गया है.

जिनके दिल में हिंदुस्तान के लिए मरने मिटने का जज्बा हमेशा रहा आज जब उनसे नागरिकता का प्रमाण साबित करने के लिए कहा जा रहा है तो इनका दिल रो रहा है और गुस्सा भी बाहर आ रहा है.

 

दरअसल असम पुलिस का एक नोटिस मिला है जिसमें उन्हें संदिग्ध वोटर की श्रेणी में रखा गया है और उनसे नागरिकता से जुड़े दस्तावेज जमा कर ट्राइब्यूनल के सामने पेश होने को कहा गया है.

इसी कारण अजमल हक को 13 अक्टूबर को ट्राइब्यूनल के सामने पेश होना है जहां पर उन्हे ये साबित करना है की वो भारतीय हैं या नहीं. शायद एक फौजी के लिए इससे बुरा कुछ भी नहीं हो सकता.

मीडिया से बात करते हुए अजमल हक ने बातया कि वो असम के रहने वाले हैं और उनके पिता का नाम 1966 की वोटर लिस्ट में भी था. यही नहीं उनकी मां का नाम 1951 के नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस में भी था. इसके बाद भी 2012 में हक की पत्नी को भी नोटिस जारी कर नागरिकता साबित करने के लिए कहा गया था.

हक कहते हैं, अगर मैं अवैझ प्रवासी हूं तो फिर मैंने भारतीय सेना में कैसे अपनी सेवा दी. मैं बहुत दुखी हूं. 30 साल देश की सेवा करने का मुझे ये इनाम मिला है. मेरी पत्नी को भी इसी तरीके से प्रताड़ित किया गया था.’

अजमल हक ने 1986 में टेक्निशियन के तौर पर सेना ज्वाइन की थी और 2016 में जेसीओ के पद से रिटायर हुए. नोटिस मिलने के बाद अजमल हक ने सेना से भी संपर्क किया है और इस मामले में मदद मांगी है. सेना की तरफ से अजमल हक को मदद का पूरा आश्वासन दिया गया है.

लेकिन एक सवाल जो शायद आप भी सोच रहे हों कि एक फौजी जिसने अपनी जिंदगी देश की सेवा में न्योछावर कर दिया आखिर उसके साथ ऐसा सलूक क्यों ?

PC- BBC.COM


Contributors

Edited by :

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...