मेरी कहानी

मेरी कहानीः मेरे गांव के लोग इशारे करके कहते थे वो देखो बुरी औरत आ रही है

तर्कसंगत

October 5, 2017

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जब मैं पहली बार मोटरसाइकिल से इस गांव में आई थी तब लोग ऐसे मेरे चारों ओर इकट्ठा हो गए थे जैसे उन्होंने पहले कभी ऐसा न देखा हो. लोग मेरी तरफ़ इशारा करते और एक दूसरे से कहते कि वो देखे, वो बुरी औरत जा रही है जो मोटरसाइकिल चलाती है. अब गांव की कई लड़कियां मुझसे मोटरसाइकिल चलाना सीखना चाहती हैं.

मैं अपनी शादी से पहले से मोटरसाइकिल चलाती थी. अब मैं एक अंतरराष्ट्रीय एनजीओ के साथ काम करती हूं. बचपन में मैं साइकिल से स्कूल जाती थी. जब मेरे पति मुझसे मिले थे तब उन्होंने कहा था कि मैं बाकी लड़कियों से अलग हूं. वो मोटरसाइकिल नहीं चला पाते हैं इसलिए हमेशा मेरे पीछे ही बैठते हैं. मेरे गांव के लिए ये बहुत अचरज की बात है. लेकिन मेरे पति ने हमेशा मुझसे यही कहा कि लोगों की बात पर ध्यान मत दो.

मेरे पति और मेरी दोनों बेटियों को मुझ पर गर्व है. मेरी बड़ी बेटी 11 साल की है और छोटी बेटी 5 साल की है. मैंने अपनी सेलरी में से बचाए 11 हज़ार रुपयों से अपनी बेटियों के लिए साइकिलें ख़रीदीं. मेरी बड़ी बेटी अपनी साइकिल से ही स्कूल जाती है. मैंने हमेशा उससे यही कहा है कि पुरुष और महिलाओं के अधिकार बराबर होते हैं. अगर एक पुरुष मोटरसाइकिल या साइकिल चला सकता है तो महिला क्यों नहीं.

मेरा सपना है कि मेरी बेटियां बड़ी होकर डॉक्टर बनें. मैंने अपनी बचत से ज़मीन भी ख़रीद ली है ताकि बड़े होकर मेरी बेटियां अपना क्लिनिक खोल सकें.

मेरी मां सिर्फ़ सात साल की थीं जब उनकी शादी हुई थी. जब मैं बड़ी हो रही थी तब मेरी मां ने भी साथ में पढ़ना शुरू किया था. हम कक्षा आठ तक एक साथ स्कूल गए थे. फिर मेरी मां ने अपने बड़े परिवार की वजह से पढ़ाई छोड़ दी. लेकिव वो मुझसे हमेशा कहती थी किलकी, तुम्हें स्वतंत्र रहना है, तुम्हें नौकरी करनी है और अपने सपने पूरे करने है.”

When I first came with my motorcycle to this village, a lot of villagers gathered and surrounded me like they never saw…

GMB Akash 发布于 2017年8月24日


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