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परमाणु हथियारों के ख़िलाफ़ काम कर रही संस्था को मिला शांति का नोबेल

तर्कसंगत

October 6, 2017

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उत्तर कोरिया और अमरीका के बीच परमाणु युद्ध के ख़तरे के माहौल में परमाणु हथियारों के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय अभियान (आईकैन) को साल 2017  का शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया है.

जेनेवा स्थित संगठन इंटरनेशनल कैंपेन टू अबोलिश न्यूक्लियर वेपंस को परमाणु हथियारों से होने वाली बर्बादी के प्रति ध्यान आकर्षित करने और परमाणु हथियारों को प्रतिबंधित करने के लिए समझौते के लिए किए गए प्रयासों के लिए ये पुरस्कार दिया गया है.

पुरस्कार की घोषणा करते हुए नोबेल समिति की चेयरमैन बेरीट रीस एंडरसन ने कहा, “हम ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जिसमें अब परमाणु हथियारों के इस्तेमाल होने का ख़तरा पहले से कहीं ज़्यादा हो गया है.”

क्या करती है आईकैन?

आईकैन सौ से ज़्यादा देशों में काम करने वाले ग़ैरसरकारी संस्थाओं का गुट है. इसकी शुरुआत ऑस्ट्रेलिया में हुई थी और साल 2007 में विएना में इसे लॉन्च किया गया था.

इस संस्था का मुख्यालय विट्ज़रलैंड के जिनेवा में है. इस संस्था को दिसंबर में नोबेल पुरस्कार से नवाज़ा जाएगा.

इस संस्था का उद्देश्य दुनिया को परमाणु हथियारों से मुक्त करना है. संस्था के प्रयासों से ही जुलाई 2017 में परमाणु प्रतिबंध समझौता हुआ था.

क्या है परमाणु प्रतिबंध समझौता?

आईकैन के प्रयासों से जुलाई 2017  में ट्रीटी ऑन द प्रोहिबिशन ऑफ़ न्यूक्लियर वेपंस (परमाणु हथियारों को प्रतिबंधित करने के लिए समझौता) पारित हई थी.

परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को क़ानूनी तौर पर रोकने वाला यह पहला समझौता है. इसके प्रभावी रूप से लागू होने के लिए कम से कम पचास सदस्य देशों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं.

इस समझौते के तहत परमाणु हथियारों का विकास,  परीक्षण, भंडारण, प्रसार, हस्तांतरण, इस्तेमाल या इस्तेमाल की धमकी देना प्रतिबंधित है.

हालांकि इस समझौते पर हुए मतदान में 69 देशों ने हिस्सा नहीं लिया था जिनमें परमाणु हथियार संपन्न सभी देश शामिल है. नेटो देशों ने भी इस पर मतदान नहीं किया है.

इस समझौते का मक़सद दुनिया को परमाणु हथियारों से मुक्त करना है. फिलहाल ये समझौता प्रभाव में नहीं है.


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