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महाराष्ट्र के माउंटेन मैन जिन्होंने पहाड़ काट कर बनाई 40 किलोमीटर सड़क. गांव छोड़ने को हुए मजबूर

तर्कसंगत

October 9, 2017

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दशरथ मांझी एक ऐसा नाम जिसे शायद देश का बच्चा-बच्चा जानता होगा लेकिन आज हम आपको बताएंगे महाराष्ट्र के मांझी कहे जाने वाले राजाराम भापकर गुरुजी से जिन्होंने 57 सालों में अपनी सारी पूंजी खर्च कर सात बार पहाड़ काटा और गांव के लिए 40 किलोमीटर की सड़क बनाई. उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है.

आजादी के वक्त अहमदनगर के गुंडेगांव को पास के गांवों से जोड़ने के लिए पगडंडी तक नहीं थी. उस दौरान भापकर गुरुजी ने 1957 में कोलेगांव की जिला परिषद स्कूल में काम करना शुरू किया था. उनके गांववालों को स्कूल पहुंचने के लिए तीन गांवों का चक्कर लगाना पड़ता था. कई बार उन्होंने सरकार से गुहार लगाया कि 700 मीटर ऊंची संतोषा पहाड़ी को काटकर सड़क बनाएं, लेकिन सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली तब उन्होंने खुद यह काम अपने हाथ में लिया.

शुरुआत में कोलेगांव पहुंचने के लिए देउलगांव से होकर जाना पड़ता था और वो सफर 29 किलोमीटर का होता था. जब उन्होंने पहाड़ को काटकर कच्चा रास्ता बनाया तो यह दूरी घटकर 10 किलोमीटर रह गई. सड़क बनाने के काम में मदद करने वालों को गुरुजी ने अपनी कमाई से मेहनताना भी दिया. वे अपनी सैलरी में से आधा पैसा मजदूरी पर खर्च कर देते थे. इन सड़कों को बनाने के लिए एक रुपया भी सरकार से नहीं लिया.
1968 में जिस रास्ते से साइकिल तक नहीं गुजर सकती थीअब वहां से बड़े-बड़े वाहन गुजरते हैं. 1991 में रिटायरमेंट के बाद जो पैसा मिलावह भी उन्होंने सड़कों पर लगा दिया. जब फावड़ा-कुदाली से काम करना मुश्किल हुआ तो उन्होंने बड़ी मशीनों का भी इस्तेमाल किया. इसपर उन्हें खुद की पेंशन का पैसा भी लगाना पड़ा, तब जाकर 1997 में सड़कें पूरी तरह बनकर तैयार हुई.

भापकर गुरुजी गांव में शराब मुक्ति की मुहिम चला रहे थे और इसलिए गांव के शराब अड्डे वालों ने उन पर हमला कर दिया. इस बारे में एसपी से शिकायत करने पर पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार तो कियालेकिन बाकी के आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए. वे गांव में खुलेआम घूम रहे थे. भापकर गुरुजी ने पुलिस प्रोटेक्शन की मांग की थीउन्होंने कहा है कि अगर प्रोटेक्शन नहीं मिला तो उन्हें मजबूरन गांव छोड़ना पड़ेगा. हालांकि गुरूजी ने गांव के शराब बेचने वालों को दूसरा बिजनेस करने की सलाह भी दी थी लेकिन इसके इतर उन्होंने गुरूजी पर ही हमला कर दिया. 


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