मेरी कहानी

मेरी कहानीः मेरे जन्म का जश्न नहीं मनाया गया था लेकिन मैं हर दिन ज़िंदगी का जश्न मनाती हूं

तर्कसंगत

October 10, 2017

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मैं एक बहुत ही पारंपरिक परिवार में पैदा हुई थी. ऐसा परिवार जहां बेटे के पैदा होने पर जश्न मनाया जाता और बेटी के पैदा होने पर अफ़सोस किया जाता. सिर्फ़ मेरी मां ही थीं जिन्होंने मुझसे कहा था कि तुम भाग्शाली हो. बस उन्होंने ही मुझे ख़ास होने का अहसास करवाया. बावजूद इसके मैं बहुत कम आत्मविश्वास के साथ बड़ी हुई.

जब मेरी शादी हुई तब तक मैं अपने पति से सिर्फ़ एक बार मिली थी. वो भी शादी तय हो जाने के बाद. मैं उस समय 17 साल की थी और वो 21 साल के थे. हम दोनों को प्यार हो गया था. मुझे आज भी वो अहसास याद है जब उन्होंने पहली बार मेरा हाथ थामा था. वो पहला टच बहुत मासूम और पवित्र था.

लेकिन मेरी ससुसार वाले खुले विचारों के थे. मेरे ससुर ने मुझे पारंपरिक कपड़ों को बजाए आधुनिक कपड़े पहनने के लिए प्रेरित किया. हालांकि मैं इसके लिए बहुत तैयार नहीं थी.

शादी के बाद भी मैंने पढ़ाई जारी रखी. लेकिन डेढ़ साल बाद ही मैं गर्भवती थी. मुझे कॉलेज छोड़ना पड़ा और मैं कभी भी अपनी डिग्री हासिल नहीं कर सकी. लेकिन कभी मुझे इसकी शिकायत नहीं रही.

हमारे दो बेटे हुए और पारिवारिक जीवन शानदार रहा. हमने बहुत यात्राएं की, अपने बच्चों को पूरा वक़्त दिया और उन्हें सही मूल्य दिए.

लेकिन बच्चे बहुत जल्दी बड़े हो जाते हैं. जब मेरे छोटे बेटे ने कॉलेज में दाख़िला ले लिया तो मुझे अचानक लगा कि मेरे पास अब करने के लिए कुछ है ही नहीं. मैं अब अपना समय खाली बैठकर बर्बाद नहीं करना चाहती थी. लेकिन मुझे सिर्फ़ एक ही चीज़ आती थीबच्चे पालना.

मैंने एक टीचर के तौर पर एक स्कूल में बिना पैसे लिए पढ़ाना शुरू कर दिया.

कुछ समय बीता और मुझे अहसास हुआ कि मैं पढ़ाने में बहुत अच्छी हूं. 38 साल की उम्र में अपने पति और सहकर्मियों के प्रोत्साहन से मैंने एक संस्थान से डिग्री लेने का फ़ैसला लिया. संस्थान ने मुझे कई बार मना किया क्योंकि मैं अपनी पढ़ाई पूरी ही नहीं कर पाई थी. लेकिन मैंने हार नहीं मानी. मैं कई घंटों तक उनके दफ़्तर के बाहर बैठी रहती इस उम्मीद में कि मैं उन्हें अपने प्रवेश के लिए मना पाउंगी. कई नाकाम प्रयासों के बाद मैं बोर्ड को मनाने में कामयाब रही. मैंने एक्स्ट्रा क्लासेज़ लीं और बाल विकास में डिप्लोमा हासिल कर लिया. इसके लिए मुझे बाकी लोगों से दोगुना मेहनत करनी पड़ी.

अब मुझे पढ़ाते हुए दस साल हो गए हैं और इस दौरान गुज़रा हर दिन शानदार रहा है. एक समय था जब मैं पूरी तरह अपने पति पर निर्भर थी और एक ये समय है जब मैं अपना वेतन पाती हूं. अपने पैसे कमाने का अनुभव प्रेरित करने वाला रहा है. ये मज़ाक लग सकता है लेकिन जबसे मैंने कमाना शुरू किया है सभी लोग मेरी पहले से ज़यादा इज़्ज़त करने लगे हैं.

पहले मैं कितनी भोली और डरपोक थी लेकिन अब मेरी अपनी आवाज़ है. अब मैं किसी को भी अपने ऊपर हावी होने का मौका नहीं देती.

एक महिला के तौर पर हम कितनी भूमिकाएं निभाते हैं. लेकिन अब मैं मानती हूं कि हम सबके लिए ये मह्तवपूर्ण है कि हम सभी विकल्प तलाशें. अगर आपने में कोई  जुनून हैं तो फिर उसे पूरा करें. मैं इस बात का ज़िंदा उदाहरण हूं कि कभी देर नहीं होती. देखिए ज़िंदगी कितनी बदल गई है, जब मैं पैदा हुई थी तब मेरे जन्म का जश्न नहीं मनाया गया था और अब मैं हर दिन ज़िंदगी का जश्न मनाती हूं. मुझे ख़ुद पर गर्व है.

“I was born into a very traditional family, where the birth of a boy is celebrated and the birth of a girl is looked…

Humans of Bombay 发布于 2017年9月25日


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