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यूपीः निजी प्रैक्टिस करने पर डॉक्टरों का पंजीकरण होगा रद्द

Poonam

October 13, 2017

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उत्तर प्रदेश में ख़राब हो रही स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने के लिए प्रदेश सरकार ने एक और सख़्त क़दम उठाया है.

प्रदेश के सरकारी डॉक्टर अगर किसी निजी अस्पताल में प्रैक्टिस करते पाए गए तो उस निजी अस्पताल का पंजीकरण भी रद्द कर दिया जाएगा.

प्रदेश सरकार ने सरकारी डॉक्टरों व एलोपैथिक चिकित्सकों को प्राइवेट प्रैक्टिस करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है.

प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी ने मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया है कि सरकारी डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस करने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं.

प्रशांत त्रिवेदी का कहना है कि यदि कोई सरकारी डॉक्टर निजी प्रैक्टिस करते हुए पाया गया तो एमसीआी से उसका पंजीकरण रद्द करने का आग्रह भी किया जाएगा.

उत्तर प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस करने पर प्रतिबंध है.

हाई कोर्ट ने भी सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध को वैध ठहराया है.

उत्तर प्रदेश हाल के महीनों में अपनी ख़राब स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चर्चा में रहा है.

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर न होने की वजह से मरीज़ों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है.

उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में सिर्फ़ एक रूपए की फ़ीस ली जाती है और दवाइयां फ्री मिलती हैं

ऐसे में ग़रीब तबके के अधिकतर मरीज़ सरकारी अस्पताल जाते हैं लेकिन डॉक्टर न होने की वजह से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

माना जा रहा है कि सरकार के सख़्त रवैये के बाद सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की मौजूदगी बढ़ेगी.

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